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Instagram पर वायरल 80s Trend के पीछे छिपा है बड़ा नुकसान, एआई फोटो बनाने की पर्यावरण को चुकानी पड़ रही कीमत

Instagram Viral Trend: इंस्टाग्राम पर 80s का ट्रेंड वायरल है। नेता से लेकर अभिनेता तक AI की मदद से फोटो को रेट्रो लुक में बदल रहे है, लेकिन इस मजेदार ट्रेंड के लिए पर्यावरण को कीमत चुकानी पड़ती है।

रीता राय सागर

Instagram 80s Trend Environment Impact: अगर आप इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं, तो आपकी नजर भी ऐसी तस्वीरों पर पड़ी होगी, जिनमें लोग अचानक 80 के दशक के स्टार जैसे नजर आ रहे हैं। बड़े बाल, फेदर्ड हेयरस्टाइल, बोल्ड कपड़े, विंटेज मेकअप और एसिड-वॉश डेनिम वाले रेट्रो पोर्ट्रेट इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।

इस तरह की तस्वीर बनाने के लिए यूजर को बस अपनी फोटो देनी होती है और एआई को प्रॉम्पट देने के कुछ ही सेकंड में उसका 80 का अवतार तैयार हो जाता है। देखने में यह ट्रेंड भले ही मजेदार लगे, लेकिन इसके पीछे की कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ सकती है।

एआई फोटो बनाने में बिजली की खपत

एआई की मदद से कोई फोटो बनाने में सेकेंड भर का समय लगता है, लेकिन इसके पीछे बड़े-बड़े डेटा सेंटर में मौजूद शक्तिशाली जीपीयू (GPUs) और दूसरे कम्प्यूटिंग सिस्टम काम करते हैं। इन सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है।

रिसर्च बताती है कि AI जेनेरेटेड तस्वीर बनाने में करीब 0.01 से 0.29 kilowatt-hours बिजली खर्च होती है। एक तस्वीर के लिए यह खपत बहुत कम लग सकती है, लेकिन जरा सोचिए, जब लाखों लोग वायरल ट्रेंड में शामिल होने के लिए एक फोटोके कई वर्जन बनाते हैं, तो बिजली की खपत कई गुना बढ़ जाती है।

सिर्फ बिजली नहीं, पानी का भी इस्तेमाल

AI के लिए इस्तेमाल होने वाले सर्वर्स लगातार काम करते हैं, इससे यह गर्म हो जाते हैं। उन्हें ठंडा रखने के लिए डेटा सेटंर्स औऱ कूलिंग सिस्टम की जरूरत पड़ती है और इसके लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। GPT-3 की ट्रेनिंग में लगभग 7 लाख लीटर पानी की जरूरत पड़ी थी। इसका मतलब है कि AI सिर्फ बिजली नहीं बल्कि पानी का भी इस्तेमाल कर रहा है।

क्या 80s ट्रेंड का मतलब एआई का इस्तेमाल बंद करना है?

बता दें कि समस्या किसी एक एआई फोटो में नहीं है, लेकिन जब भी कोई ट्रेंड आता है, तो बड़े पैमाने पर बिना वजह के लाखों की संख्या में जेनेरेशन होते हैं और समस्या यहीं से शुरु होती है। अगर कोई व्यक्ति एक तस्वीर बनाता है तो उसका प्रभाव सीमित होता है, लेकिन जब करोड़ों लोग सिर्फ ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए एक ही फोटो के 10-20 वर्जन बनाते हैं, तो उसका प्रभाव बहुत बड़े पैमाने पर पड़ता है।

इसलिए अगली बार इंस्टाग्राम पर कोई ट्रेंड वायरल हो, तो सोच-समझकर जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करें। AI टेक्नोलॉजी समस्या नहीं है, लेकिन हर वायरल ट्रेंड को फॉलो करना समस्या है। इसकी कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ सकती है।

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