ठंड बढ़ने पर प्यास कम लगे, तब भी दिनभर नियमित रूप से पानी पीते रहें।
पानी के अलावा फल, सब्जियां, छाछ और सूप भी तरल पदार्थों की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं।
गहरे रंग का पेशाब, चक्कर और असामान्य थकान डिहाइड्रेशन के संकेत हैं।
How To Stay Hydrated: मौसम बदलते ही खानपान और दिनचर्या में बदलाव आने लगता है। अक्तूबर खत्म होने को है और मौसम भी करवट ले रहा है, ऐसे में पसीना कम आता है और प्यास पहले से कम महसूस होती है। ऐसे में कई लोग अनजाने में पानी पीना कम कर देते हैं।
शरीर को हाइड्रेटेड रखने की जरूरत सिर्फ गर्मियों में नहीं, बल्कि हर मौसम में होती है। पानी की पर्याप्त मात्रा शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, पाचन और सामान्य शारीरिक कामकाज के लिए जरूरी है।
सुबह उठने के बाद पानी पिएं और काम के दौरान भी अपने पास बोतल रखें। एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय दिनभर नियमित रूप से पानी पीना बेहतर है। पानी की जरूरत मौसम, शारीरिक गतिविधि और सेहत के अनुसार बदल सकती है।
संतरा, मौसंबी, अंगूर, खीरा और दूसरे मौसमी फल शरीर को तरल और पोषक तत्व देने में मदद करते हैं। इन्हें जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना अच्छा विकल्प है।
अगर ठंडा पानी पीने का मन नहीं करता, तो सामान्य तापमान का पानी या गुनगुना पानी ले सकते हैं। खाने के साथ छाछ और दिनचर्या में सब्जियों का सूप शामिल करना भी शरीर को हाइड्रेट रखता है। ध्यान रखें कि इनमें नमक जरूरत से ज्यादा न हो।
पानी में नींबू या खीरे के कुछ टुकड़े डालकर स्वाद बदल सकती हैं। बिना ज्यादा चीनी वाली हर्बल चाय भी शरीर में तरल पदार्थ बढ़ाती है।
पेशाब का रंग सामान्य से गहरा होना, मुंह सूखना, चक्कर आना या असामान्य थकान पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग आम तौर पर डिहाइड्रेशन का संकेत है।
सामान्य दिनचर्या में पर्याप्त पानी और संतुलित खानपान हाइड्रेशन से निपटने के लिए पर्याप्त होते हैं। ORS का इस्तेमाल खासकर दस्त या उल्टी से पानी और खनिज-लवण की कमी होने पर उपयोगी है। इसे रोजमर्रा के पानी के विकल्प के रूप में न लें।