बोन ग्लू (सौ.सोशल मीडिया) 
हेल्थ

अब मिनटों में ठीक होगा बोन फ्रैक्चर, चीन के वैज्ञानिकों ने तैयार किया दुनिया का पहला 'बोन ग्लू'

Bone Glue for Bones Health: चीन के वैज्ञानिकों ने प्लास्टर से छुटकारा दिलाने के लिए ऐसा अविष्कार किया है जो दुनिया को चौंका रहा है। वैज्ञानिकों ने एक प्रकार का 'बोन ग्लू' तैयार किया है।

दीपिका पाल

Chinease Scientists invented Bone Glue: सड़क दुर्घटनाएं केवल भारत ही नहीं दुनिया का भी हिस्सा है। मिनटों में दुर्घटना में कई लोगों की मौत होती है तो वहीं पर एक्सीडेंट में शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचता है। सड़क हादसों के बाद सबसे गंभीर बीमारी के रूप में बोन फ्रैक्चर के मामले देखने के लिए मिलते है। सही इलाज न मिलने पर लंबे समय तक दर्द, चलने-फिरने में परेशानी और जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हड्डी टूटने के बाद जहां पर इसे जोड़ने के लिए प्लास्टर का इस्तेमाल किया जाता है। चीन के वैज्ञानिकों ने प्लास्टर से छुटकारा दिलाने के लिए ऐसा अविष्कार किया है जो दुनिया को चौंका रहा है। वैज्ञानिकों ने एक प्रकार का 'बोन ग्लू' तैयार किया है। दावा किया जा रहा है कि इसकी मदद से टूटी हड्डियों को मिनटों में जोड़ा जा सकता है।

कैसे होता है बोन ग्लू

द लैसेंट रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चीन के झेजियांग में वैज्ञानिकों ने बोन ग्लू तैयार करने की जानकारी दी है। यह बायोएडहेसिव एक प्रकार का चिपकने वाला पदार्थ है जो प्राकृतिक रूप से दो सतहों को जोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है, खासकर जहां एक सतह जीवित ऊतक है। बोन ग्लू को बनाने के बाद वैज्ञानिकों द्वारा दावा किया जा रहा है कि, बोन फ्रैक्चर में टूटी हड्डियों को जोड़ने के लिए यह खास प्रकार का ग्लू काम करता है। यह बोन ग्लू कितना सुरक्षित है और कितना असरदार। इसे लेकर अब तक 50 से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं। अब तक के परीक्षणों से पता चला है कि ये मानव इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है और हड्डियों को फिर से जोड़ने में मददगार हो सकती है। अब तक 150 से अधिक लोगों को इसका परीक्षण किया जा चुका है जिसके अच्छे परिणाम देखे गए हैं।

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10 साल पहले भी हो चुके है प्रयोग

चीन के बोन ग्लू को बनाने के प्रयोग से पहले 2010 में ऐसे ही ग्लू की खोज की गई थी। इसमें 2010 में, पर्ड्यू विश्वविद्यालय में एक अमेरिकी शोध दल ने पहली बार प्रोटीन और कैल्शियम कार्बोनेट युक्त अनोखे "गोंद" तैयार की थी। डॉ. लिन की टीम ने 2016 में प्रयोग करना शुरू किया और एक चिपकने वाला पदार्थ तैयार किया था। इस दौरान डॉक्टर ने बताया कि, यह हड्डियों के टूटने, फ्रैक्चर और ऑर्थोपेडिक सर्जरी में क्रांति ला सकता है। इसमें पारंपरिक इम्प्लांट से बचाव होगा, सर्जरी का समय कम होगा और हड्डियों को आसानी से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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