Global Talent Acquisition Day: आज के समय में एचआर का काम सिर्फ कंपनी के लिए लोगों को हायर करना या छुट्टियां मैनेज करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब एचआर प्रोफेशनल से उम्मीद की जाती है कि वह बिजनेस को समझें, सही टैलेंट को पहचाने, डेटा के आधार पर फैसला करें और जरूरत पड़ने पर मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच एक मजबूत कड़ी की तरह काम करे।
अगर आप भी एचआर या टैलेंट एक्युजिशन में करियर बनाना चाहते हैं, तो सिर्फ डिग्री या कुछ साल का अनुभव काफी नहीं है, आपके पास कुछ ऐसी प्रैक्टिकल स्किल भी होनी चाहिए जो आपको बाकी लोगों से अलग बनाएं।
एचआर को रोजाना अलग-अलग तरह के लोगों से कम्युनिकेट करना होता है। कैंडिडेट से बात करनी होती है, मैनेजर को किसी कर्मचारी की समस्या या कोई और सिचुएशन समझानी हो या इंटरव्यू लेना हो, हर जगह पर आपका कम्युनिकेशन स्किल ही काम आता है। इसके ले सिर्फ अच्छी इंग्लिश बोलना ही काफी नहीं है, बल्कि बात को सही तरीके से समझाना, ध्यान से सुनना और सामने वाले की बात को समझना भी उतना ही जरूरी है। एक एचआर को इम्प्लॉय, मैनेजर औऱ सीनियर लीडरशिप के साथ-साथ अलग-अलग तरीके से बात करनी होती है।
एचआर कोई भी डिसीजन अनुमान के आधार पर या बिना डेटा के नहीं ले सकता है। इसके लिए उसे टर्नओवर, हायरिंग, अटेंडेंस, परफॉर्मेंस औऱ इंगेजमेंट जैसी हर चीज के बारे में पहले समझना होता है, इसके बाद ही कोई भी निर्णय लिया जाता है। इसलिए अगर आप भी एचआर के प्रोफेशन में करियर बनाना चाहते हैं, तो बेसिक डेटा एनालिसिस और एचआर एनालिटिक्स सीखना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
र्आटिफिशियल इंटेलीजेंस ने के बाद हर फील्ड की तरह एचआर का काम भी बदला है। कैंडिडेट स्क्रीनिंग, शेड्यूलिंग, रिपोर्टिंग जैसे कई रूटीन टास्क में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि AI एचआर प्रोफेशनल की जगह ले सकता है। ऐसे में जरूरी है एआई टूल्स को समझना और उसका सही जगह पर सही इस्तेमाल करना।
एचआर के तौर पर काम करते हुए सिर्फ कर्मचारी की जरूरतो का ख्याल रखना काफी नहीं है, आपके ए यह भी जानना जरूरी है कि बिजनेस कैसे होता है। मान लीजिए, किसी पोजिशन पर हायरिंग करनी है, तो क्या सिर्फ कैंडिटेट की एजुकेशनल बैकग्राउंड को देखना काफी नहीं होगा। यह समझना भी जरूरी है कि उसके हायरिंग से कंपनी को क्या फायदा होगा।
एचआर में कई बार कर्मचारी अपनी ऐसी परेशानी लेकर आता है जिसे वह किसी और से साझा नहीं करना चाहता। ऐसे समय में सिर्फ नियम बताना काम नहीं आता। सामने वाले की बात बिना उसे जज किए सुनना और उसकी सिचुएशन को समझ कर हल निकालना एक एचआर की खासियत होती है। इससे इम्प्लॉय रिलेशन और सिचुएशन हैंडलिंग क्षमता बढ़ती है।
एचआर के फील्ड में हर दिन एक जैसा नहीं होता है। कभी किसी कर्मचारी की शिकायत आती है, तो कभी हायरिंग की समस्या आती है और कई बार दो लोगों के बीच किसी बात को लेकर कॉनफ्लिक्ट सामने आता है। ऐसे में प्रॉब्लम को समझकर उसका प्रैक्टिकल और नॉन-बायस्ड सॉल्यूशन निकलना भी जरूरी होता है।
एचआर की दुनिया लगातार बदल रही है। नई टेक्नोलॉजी, वर्कप्लेस प्रैक्टिस, पॉलिसी और कर्मचारी की उम्मीदों के आधार पर खुद को अपडेट रखना पड़ता है। इसके लिए किसी डिग्री या कोर्स की जरूरत नहीं होती है। इंडस्ट्री से जुड़े आर्टिकल को पढ़ना, प्रोफेशनल से सीखना, नेटवर्किंग और सेमिनार में हिस्सा लेना आपके स्किल्स को अपडेटेड रखती है।