Ashwagandha vs Shatavari for women's health: भारतीय महिलाओं में बढ़ता तनाव, एंग्जायटी और थकान स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इन समस्याओं के कई कारण हैं, लेकिन कुछ ऐसी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जड़ी-बूटियाँ हैं जो शरीर और मन पर पड़ने वाले इनके बुरे असर को कम करने में मदद कर सकती हैं। ऐसी ही दो असरदार जड़ी-बूटियाँ हैं- अश्वगंधा और शतावरी।
ये दोनों ही जड़ी-बूटियां तनाव के स्तर को कम करने और हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती हैं। सही मात्रा में अश्वगंधा लेने से तनाव और एंग्जायटी कम हो सकती है। वहीं, 'फ्रंटियर्स ऑफ़ रिप्रोडक्टिव हेल्थ' में प्रकाशित रिसर्च इस बात की पुष्टि करती है कि शतावरी की जड़ मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन को संतुलित करने में फायदेमंद होती है।
जब स्ट्रेस हार्मोन 'कोर्टिसोल' प्राकृतिक हार्मोन पर असर डालता है, तो हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका असर मासिक धर्म चक्र, एनर्जी लेवल और दिन भर के मूड पर दिख सकता है। तनाव और हार्मोन आपस में जुड़े होते हैं और इनके कारण बाल झड़ना, थकान और एंग्जायटी जैसे लक्षण हो सकते हैं। आज की फास्ट लाइफ स्टाइल में अत्यधिक मानसिक थकान भी हार्मोन असंतुलन का कारण हैं।
शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे महिलाओं के लिए जड़ी-बूटियों की रानी कहा जाता है। शतावरी पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण का काम करती है। यह एस्ट्रोजन के संतुलन पर काम करती है, जिससे रिप्रोडक्टिव सिस्टम को मदद मिलती है और नर्वस सिस्टम बेहतर ढंग से काम करता है। यह फर्टिलिटी को बढ़ावा देना, पीरियड्स के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करना और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाने का काम करती है। इसकी तासीर ठंडी होती है।
'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज' में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, सीमित मात्रा में लेने पर अश्वगंधा स्ट्रेस लेवल को कम करता है। यह स्ट्रेस कम करने, कोर्टिसोल लेवल घटाने और एक एडाप्टोजेन के तौर पर बड़े पैमाने पर काम करने के लिए जाना जाता है। इसकी तासीर गरम होती है।