अंबादास दानवे, संजय शिरसाट (pic credit; social media)
Uddhav Thackeray and Eknath Shinde: उद्धव की पार्टी शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के नेता तथा विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कुछ दिन पहले कहा था कि अब दोनों शिवसेना को एक हो जाना चाहिए। उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुई बगावत के बाद पार्टी के दो हिस्सों में बंटने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।
इस पर प्रतिक्रिया देने के दौरान उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला। सामाजिक न्याय मंत्री शिरसाट ने तंज कसते हुए कहा कि दोनों शिवसेना के एक साथ आने की अपनी ख्वाहिश दानवे, उद्धव ठाकरे के समक्ष व्यक्त करें।
उद्धव ठाकरे एक बादशाह की तरह करते है बर्ताव
शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे एक बादशाह की तरह बर्ताव करते हैं। उन्हें कभी किसी और की सुनने की आदत नहीं है। इसलिए हमें बगावत करनी पड़ी। उन्होंने आगे कहा कि अंबादास दानवे कह रहे हैं कि दोनों शिवसेना को एक साथ आना चाहिए। मैं 40 साल से शिवसेना में हूं, मुझे याद है जब मैंने अंबादास दानवे के वार्ड में पहली एक शाखा लगाई थी, तब वह 8वीं कक्षा में पढ़ते थे।
वह मुझसे काफी जूनियर हैं। उद्धव ठाकरे हमारी बात नहीं सुनते थे। आज भी वही स्थिति है। कुछ भी नहीं बदला है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सभी विधायक बाहर निकले, तो मैंने सबसे पहले उद्धव ठाकरे को एक खुला पत्र लिखा और कुछ सवाल पूछे। उसकी वजह से आज भी मुझे निशाना बनाया जाता है।
शिरसाट ने कहा- मेरे कई विरोधी हैं
संजय शिरसाट ने कहा कि शिवसेना प्रवक्ता के रूप में पार्टी के लक्ष्यों, नीतियों, विचारों और विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोपों और आलोचनाओं का जवाब देना मेरी जिम्मेदारी है। स्वाभाविक रूप से, इससे मेरे विरोधियों भी बड़ी संख्या पैदा हो गए हैं। मेरे खिलाफ झूठे आरोप, झूठी शिकायतें की जाती हैं। इसलिए, मैं वर्तमान में सबसे विवादास्पद और चर्चित मंत्री बन गया हूं। शिरसाट ने कहा मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निश्चित रूप से मुझे परेशान करते हैं, लेकिन राजनीति में इसे बर्दाश्त करना पड़ता है।
बालासाहेब ने मुझे उम्मीदवारी दी
शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे लोगों को जोड़ते थे। वे हर काम करने वाले पर ध्यान देते थे। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे बालासाहेब के साथ दो-दो घंटे बिताने का मौका मिला, जिनसे मिलने के लिए लोग तरसते थे। मैंने चार बार विधानसभा चुनाव लड़ा। बालासाहेब के रहते जब मुझे पहली बार उम्मीदवारी मिली, तो पार्टी में बड़ी होड़ मची हुई थी, बड़े-बड़े नाम उम्मीदवारी के लिए कतार में थे। लेकिन बालासाहेब ने साफ कह दिया कि टिकट संजय को मिलेगा और मुझे मिल गया। मैं छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में दस साल तक नगरसेवक रहा। मुझे दो बार महापौर बनने का अवसर मिला, लेकिन मैं महापौर नहीं बन सका। राजनीति में क्या होगा, कहना संभव नहीं है।
सफलता के पीछे मेहनत और संघर्ष दिखाई नहीं देता
शिरसाट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आज, एक रिक्शा चालक, एक कंपनी में सात रुपये प्रतिदिन काम करनेवाला या सब्जी बेचनेवाले व्यक्ति को मंत्री के रूप में देखा जाता है तो उसका पद, शक्ति और धन दिखाई देता है, लेकिन किसी को भी इसके पीछे मेरी मेहनत और संघर्ष दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और बदले की भावना से लगाए जा रहे हैं। अगर मैंने कुछ भी गलत किया है, तो मंत्री पद की बात तो दूर, मैं अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दूंगा, लेकिन अगर कोई झूठे आरोप लगाकर मेरा करियर खत्म करने की कोशिश करता है, तो मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा।
लटक रही है मंत्री पद पर तलवार
बेडरूम में नोटों से भरे बैग के साथ वीडियो वायरल होने के बाद से मंत्री शिरसाट मुश्किलों में घिर गए हैं. उनके मंत्री पद पर तलवार लटक रही है. तो वहीं राज्य मंत्री माधुरी मिसाल भी शिरसाट के अधिकारों में अतिक्रमण कर रही हैं. इस पर उन्होंने हाल ही में पत्र लिखकर ऐतराज जताया था.