शेख हसीना को लेकर यूनुस सरकार का बड़ा फैसला, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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खामोश कर दी गई शेख हसीना की आवाज! बांग्लादेश में यूनुस सरकार का बड़ा फैसला, जानिए पूरा मामला

Bangladesh News in hindi:बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि शेख हसीना से संबंधित किसी भी भाषण या बयान का प्रसारण अब प्रतिबंधित रहेगा।

अमन उपाध्याय

Sheikh Hasina News: बांग्लादेश के नागरिक अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुराने बयान या भाषण नहीं सुन सकेंगे। दरअसल, अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने मीडिया संगठनों को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी अखबार, टीवी चैनल या ऑनलाइन पोर्टल ने शेख हसीना के किसी भी बयान या भाषण को प्रकाशित या प्रसारित किया, तो उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

बांग्लादेश की सरकार द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने गुरुवार को अदालत और कानून की अनदेखी करते हुए शेख हसीना का भाषण चलाया। इस भाषण में, सरकार के अनुसार, कई भ्रामक और उत्तेजक बातें कही गई थीं।

पहले से ही लगाई गई पाबंदी

सरकार ने चेतावनी जारी करने का कारण बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को दोषी ठहराया है और उन पर अब भी मानवता विरोधी अपराधों के मामले लंबित हैं। सरकार का यह भी कहना है कि अवामी लीग की गतिविधियों पर पहले से ही पाबंदी लगाई जा चुकी है। साथ ही, 2009 के आतंकवाद-रोधी कानून के तहत यह प्रावधान है कि अगर कोई प्रतिबंधित संगठन या उसके नेताओं के भाषण, गतिविधि या प्रचार को प्रकाशित करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

 नफरत भरे भाषणों के प्रसारण पर रोक

अंतरिम सरकार ने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा है कि शेख हसीना को अब एक दोषी अपराधी और मानवता विरोधी अपराधों में फरार आरोपी माना गया है। सरकार ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म या टीवी चैनलों पर हसीना की आवाज़, भाषण या बयान प्रसारित करना 2009 के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। बयान में यह भी उदाहरण दिया गया कि ठीक इसी तरह पिछले साल दिसंबर में पूर्व यूगोस्लाविया के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने एक तानाशाह के नफरत भरे भाषणों के प्रसारण पर रोक लगाई थी।

हसीना के बयानों को लेकर सरकार का कहना है कि ये केवल जनता को भ्रमित ही नहीं करते, बल्कि देश में चल रहे लोकतांत्रिक बदलाव की स्थिरता और शांति के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं। सरकार ने मीडिया से जिम्मेदारीपूर्वक काम करने की अपील की है और साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई संस्था इस आदेश को नहीं मानती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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