झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Image- Social Media) 
झारखंड

झारखंड में नाम बदलने पर सियासत, BJP ने हेमंत सोरेन पर लगाया परिवारवाद का आरोप

हेमंत सोरेन पर आरोप है कि वह राज्य सरकार की ओर से चलाई जाने वाली योजनाओं का नाम अपने परिवार के लोगों के नाम पर रखते हैं। सोरेन ऐसा राजनीतिक लाभ पाने के लिए करते हैं, जो उनकी ओछी राजनीति को दर्शाता है।

अक्षय साहू

रांची: अक्टूबर 2018 में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था। इसके बाद कई और राज्य की सरकारों ने अपने शहरों के नाम बदले, जिसे लेकर समय-समय पर राजनीति भी होती रहती है। इसी कड़ी में झारखंड सरकार ने भी एक यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का फैसला लिया है, जिसे लेकर सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी घमासान शुरू हो गया है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की मीटिंग हुई। इस दौरान झारखंड सरकार ने राजधानी रांची में स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने के फैसले पर अपनी स्वीकृति दे दी। इसे लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर पारिवारवाद और आदिवासी नायकों के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ का आरोप लगाया।

परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे सोरेन

भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने सीएम सोरेन पर आरोप लगाया कि झारखंड की उपराजधानी दुमका जिले में जब मयूराक्षी नदी पर राज्य का सबसे बड़ा पुल बना, तो उसका नाम आदिवासी नायक बाबा तिलका मांझी के नाम पर न रखकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन के नाम पर रख दिया। उसी तरह झारखंड में गरीब परिवारों को साल में दो बार मिलने वाली धोती-साड़ी योजना को भी उन्होंने अपने दादा-दादी, सोना-सोबरन के नाम से जोड़ दिया, जबकि इसे आदिवासी समाज के किसी भी  महानायक के नाम से भी जोड़ा जा सकता था। लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें दरकिनार कर दिया और अपने परिवार के लोगों के नाम पर योजना का नाम रख दिया।

साह ने कहा, जब पूरा देश पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए हुए है, ऐसे समय में झारखंड सरकार की यह ओछी राजनीति साबित करती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा को न तो देश की चिंता है और न ही झारखंड के आत्मसम्मान की परवाह है।

उन्होंने कहा, अगर सरकार में सच में हिम्मत है और वह आदिवासी महान नायकों के सम्मान की बात करती है, तो मयूराक्षी नदी पर बने शिबू सोरेन पुल का नाम बदलकर वीर बुधु भगत के नाम पर कर दिखाए। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदले जाने को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री ऐसा करके न सिर्फ एक देशभक्त महापुरुष का अपमान कर रही है, बल्कि आदिवासी नायकों के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ कर रही है।

JMM ने जताई खुशी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय किए जाने के फैसले पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खुशी जताई है। जेएमएम ने इसे वीर बुधु भगत जी के सम्मान के तौर पर देख रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार का यह फैसला आदिवासी नायकों के सम्मान और प्रतिबद्धता को दिखाता है।

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