Lightning Deaths In Jharkhand And UP: देश के कई राज्यों में मानसून की मूसलाधार बारिश अब जानलेवा साबित हो रही है। मंगलवार का दिन झारखंड और उत्तर प्रदेश के लिए किसी काल से कम नहीं रहा, जहां आसमान से गिरी बिजली और बिजली के झटकों ने 13 लोगों की जिंदगी छीन ली। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक, प्रकृति के इस रौद्र रूप ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
झारखंड में मंगलवार को आकाशीय बिजली का सबसे भयावह रूप देखने को मिला। राज्य के तीन जिलों, गिरिडीह, दुमका और लातेहार में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 8 लोग घायल हो गए। सबसे अधिक तबाही गिरिडीह जिले में हुई, जहां कुल 8 लोगों ने अपनी जान गंवाई। खोरिमाहुआ के SDPO अमरेंद्र कुमार के अनुसार, अकेले उनके सब-डिवीजन के तीन थाना क्षेत्रों में 7 लोगों की मौत हुई है। वहीं दुमका के रामगढ़ ब्लॉक में एक बच्चे सहित चार लोग घायल हुए और 3 लोगों की मौत हो गई। लातेहार में भी बिजली गिरने से 3 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई है।
झारखंड में जहां आसमानी बिजली ने कहर ढाया, वहीं उत्तर प्रदेश में घरेलू और सार्वजनिक बिजली के झटकों ने 3 लोगों की जान ले ली। देवरिया जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर आई, जहां आसनहार गांव में महज 8 साल की एक मासूम बच्ची अपने घर में मोबाइल फोन चार्ज कर रही थी। उसी दौरान उसे जोरदार करंट लगा और वह बुरी तरह जल गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
हादसों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। एटा में 10 साल का मासूम आरुष, जो अपने छोटे भाई को ट्यूशन छोड़कर घर लौट रहा था, रास्ते में एक बिजली के ट्रांसफार्मर की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। वहीं, लखनऊ के गोसाईगंज इलाके में एक मंदिर के 65 वर्षीय पुजारी रूप चंद की घरेलू बिजली के संपर्क में आने से मौत हो गई। हालांकि, एटा में ही एक राहत भरी खबर भी रही, जहां 6 साल की बच्ची फिजा को सार्वजनिक वाटर कूलर से करंट लगा, लेकिन स्थानीय दुकानदारों की मुस्तैदी ने उसकी जान बचा ली।
पूरे देश में हो रही मूसलाधार बारिश ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। पहाड़ी राज्यों में जहां भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं मैदानी इलाकों में नदियां उफान पर हैं और सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात ठप हो गया है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों में जाने से बचें, क्योंकि बारिश के साथ बिजली गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
यह घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। चाहे वह बिजली के उपकरणों का उपयोग हो या खराब मौसम में बाहर निकलना, सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है।