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झारखंड

JPSC-JSSC परीक्षा घोटाला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CBI जांच की मांग पर राज्य सरकार से जवाब तलब

SC On JPSSC Scandal: सुप्रीम कोर्ट ने JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

अनन्या तिवारी

Supreme Court Notice To Jharkhand Government: झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में हुई भारी गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश दिया है। सोमवार को हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड सरकार और मामले से जुड़े अन्य सभी पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस की पीठ ने की मामले की सुनवाई

इस गंभीर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की एक उच्चस्तरीय पीठ द्वारा की गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहनन की विशेष पीठ के समक्ष यह याचिका सुनवाई के लिए आई थी। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दायर इस याचिका में राज्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं में फैले कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया गया है। याचिकाकर्ता के वकील सत्यम राजपूत ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए दलीलें पेश कीं।

पैसे देकर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति का गंभीर आरोप

याचिका में झारखंड के भर्ती सिस्टम पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट को बताया गया कि विभिन्न सरकारी पदों के लिए आयोजित परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। कथित तौर पर पैसे का भारी लेन-देन हुआ और योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर अयोग्य अभ्यर्थियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाकर विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त कर दिया गया। इस धांधली के खिलाफ राज्य के छात्र और अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और लगातार एक निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग उठा रहे हैं।

राज्य सरकार के रुख पर उठाए गए सवाल, केंद्रीय एजेंसी से जांच क्यों जरूरी?

याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खुद इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने के पक्ष में नहीं है। यही कारण है कि मामले की पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। इस याचिका में केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि भारत सरकार , CBI, CID, JPSC और JSSC को भी प्रतिवादी (उत्तरदाता) बनाया गया है।

केवल 1-2 नियुक्तियों तक सीमित नहीं है गड़बड़ी का दायरा

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए याचिका में बताया गया कि इस धांधली का दायरा बहुत व्यापक है। यह भ्रष्टाचार किसी एक या दो परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरी नियुक्ति प्रणाली को अपनी चपेट में ले लिया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि गड़बड़ियों की व्यापकता और गंभीरता को देखते हुए केवल किसी विभागीय समिति या राज्य स्तरीय जांच एजेंसी (जैसे सीआईडी) द्वारा की जा रही जांच इसके लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

पहले ही रद्द हो चुकी हैं 22 परीक्षाएं, 6 पर लगी है रोक

राज्य में भर्ती परीक्षाओं के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CID की जांच में धांधली की पुष्टि होने के बाद सरकार को पहले ही बड़े कदम उठाने पड़े हैं। गड़बड़ियों के पुख्ता मामले सामने आने के बाद झारखंड सरकार पहले ही कुल 22 नियुक्ति परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द कर चुकी है। इसके अलावा, छह अन्य नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित (पोस्टपोन) किया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले में राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अदालत के सामने अपना रुख स्पष्ट करना होगा, जिससे इस पूरे परीक्षा विवाद का भविष्य तय होगा।

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