झारखंड में नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार (सौजन्य-IANS) 
झारखंड

₹1 करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार, झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी, 2 दशकों से था फरार

Jharkhand Naxal News: झारखंड में धनबाद के बरवाड्डा थाना क्षेत्र से 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया है। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली।

प्रिया जैस

Jharkhand Naxalite Misir Besra Arrest: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को इस साल की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। भाकपा (माओवादी) संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को उसके दो प्रमुख सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे राज्य में माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रही हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और कोबरा बटालियन ने खुफिया सूचना के आधार पर मंगलवार देर रात धनबाद और गिरिडीह जिले के सीमावर्ती इलाके में संयुक्त अभियान चलाकर मिसिर बेसरा को दबोचा। उसके साथ 15 लाख रुपए के इनामी माओवादी संगठन के रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण मुर्मू और गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया।

16 माओवादी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

अभियान के दौरान दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के पहले मंगलवार को रांची में 16 माओवादी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण करने वालों में मिसिर बेसरा का करीबी अंगरक्षक देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा भी शामिल था।

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सुरक्षा एजेंसियों को उससे मिसिर बेसरा की गतिविधियों और संभावित ठिकाने की महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया गया। मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, उर्फ सुनिर्मल, उर्फ सागर, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र का रहने वाला है। वह करीब चार दशक पहले माओवादी संगठन से जुड़ा था और बाद में संगठन के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले पोलित ब्यूरो का सदस्य बना।

2009 में हुआ था फरार

झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली और रंगदारी सहित 150 से अधिक मामले दर्ज हैं। मिसिर बेसरा को वर्ष 2007 में खूंटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर में माओवादियों द्वारा किए गए हमले के दौरान वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया था।

झारखंड में माओवादी संगठन को बड़ा झटका

इसके बाद से वह करीब दो दशकों तक सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल रहा। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से झारखंड में माओवादी संगठन के नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है। हाल के महीनों में लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से संगठन पहले ही कमजोर पड़ा था। अब शीर्ष नेतृत्व के गिरफ्त में आने से इसके शेष नेटवर्क पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।

फिलहाल केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां मिसिर बेसरा तथा उसके सहयोगियों से गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से माओवादी संगठन के सक्रिय नेटवर्क, हथियारों के जखीरे, वित्तीय स्रोतों और सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। हालांकि, गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया जाना अभी बाकी है।

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