एनकाउंटर में मारा गया आतंकी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
जम्मू कश्मीर

कुलगाम में पहलगाम के गुनहगार ढेर; जवानों ने कई आतंकियों को घेरा, दोनों तरफ से हो रही गोलीबारी

Jammu-Kashmir News: कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच सुबह गुड्डर के जंगलों में मुठभेड़ हो गई। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया है। वहीं एक जवान शहीद हुआ है।

अभिषेक सिंह

Kulgam Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना ने 2 आतंकियों को मार गिराया है। सोमवार सुबह गुड्डर के जंगलों में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। सेना ने इसे ऑपरेशन गुड्डर नाम दिया है। इस दौरान एक जवान शहीद हो गया है और एक अन्य जवान घायल है।

मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान शोपियां निवासी आमिर अहमद डार के रूप में हुई है। वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था और सितंबर 2023 से सक्रिय था। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी 14 आतंकियों की सूची में भी उसका नाम शामिल था। आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस, सेना की 9RR और CRPF की एक संयुक्त टीम ने इलाके में तलाशी शुरू की।

अब भी छिपे हैं 3 से ज्यादा आतंकी

जानकारी के अनुसार, जंगल में लश्कर के 3 से ज़्यादा आतंकी छिपे हुए हैं। दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए हैं। आतंकियों के छिपे होने की खबर मिलने के बाद टीम गुद्दर के जंगलों में संदिग्ध जगह पर पहुंची। जहां छिपे आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद जवानों ने जवाबी कार्रवाई की।

सीमा से एक घुसपैठिया गिरफ्तार

इसके अलावा, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा निवासी सिराज खान नाम के इस घुसपैठिए को रविवार रात 9.20 बजे ऑक्ट्रोई पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने देखा।

कुछ राउंड फायरिंग के बाद, उसे सीमा पर बाड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से कुछ पाकिस्तानी मुद्रा भी मिली है। घुसपैठ की उसकी कोशिश के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। अब देखना यह है कि वह क्या राज खोलता है।

26 अगस्त को मारे गए 2 आतंकी

इससे पहले 26 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे। इनमें से एक की पहचान बागु खान के रूप में हुई, जिसे 'ह्यूमन जीपीएस' कहा जाता था। सुरक्षा बल दशकों से उसकी तलाश कर रहे थे क्योंकि वह 1995 से 100 से ज़्यादा घुसपैठ की कोशिशों में शामिल था। वह घुसपैठ के सभी रास्तों को जानता था और बिना पकड़े उन्हें अंजाम देता था, इसलिए उसे 'ह्यूमन जीपीएस' नाम दिया गया था।

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