नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (फोटो- सोशल मीडिया) 
जम्मू कश्मीर

'दिल्ली एक दिन पछताएगी...', जम्मू-कश्मीर को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने क्यों दी इतनी बड़ी चेतावनी?

Jammu-Kashmir के पूर्व सीएम व नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नई दिल्ली को एक दिन जम्मू-कश्मीर पर अपने फैसलों पर पछताना पड़ेगा। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई।

सौरभ शर्मा

Farooq Abdullah Remark on Article 370: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे हुए पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन सियासत अभी भी गर्म है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बड़ी बात कही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल नहीं किया गया तो नई दिल्ली को एक दिन अपने फैसलों पर पछताना पड़ेगा। उनके इस बयान ने एक बार फिर से घाटी की राजनीति में हलचल मचा दी है।

फारूक अब्दुल्ला ने यह बातें अनंतनाग पश्चिम के विधायक अब्दुल मजीद भट लारमी के नेतृत्व में आए एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहीं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ इस बैठक में उन्होंने संगठनात्मक मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की। अब्दुल्ला ने कहा कि अगस्त 2019 के बाद केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एकतरफा फैसलों ने लोगों का भरोसा जीतने के बजाय उनसे दूरियां ही बढ़ाई हैं। उनके मुताबिक, सरकार ने बार-बार जनता का विश्वास हासिल करने के सुनहरे मौके को गंवा दिए हैं।

"यह न्याय और समानता का सवाल है"

फारूक अब्दुल्ला ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के फैसले पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस वक्त सरकार ने दावा किया था कि इन फैसलों से जम्मू-कश्मीर देश के बाकी हिस्सों के बराबर आ जाएगा, लेकिन आज यहां के लोगों के साथ अलग व्यवहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनावों में लोगों ने भारी संख्या में मतदान करके भारतीय संविधान और लोकतंत्र में अपना विश्वास दिखाया है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी उस विश्वास को कमजोर कर रही है।

अधिकारों के लिए संघर्ष रहेगा जारी

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने साफ किया कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और संवैधानिक गारंटियों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि न्याय, समानता और जनता से किए गए वादों को पूरा करने का है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह जनता से किए वादे निभाए और बिना किसी देरी के जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा वापस लौटाए, क्योंकि वादों की पूर्ति से ही जनता का भरोसा मजबूत होगा।

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