मुंबई: मुंबई में एक विशेष अदालत ने श्रमिक नेता दत्ता सामंत की हत्या मामले (Datta Samant Murder Case) में गैंगस्टर छोटा राजन (Underworld Don Chhota Rajan) को शुक्रवार (28 जुलाई) को बड़ी राहत दी है। सीबीआई कोर्ट ने राजन को हत्या मामले में रिहा कर दिया है। विशेष सीबीआई जस्टिस ए. एम. पाटिल ने प्रमाणिक सबूत की कमी के कारण छोटा राजन को सभी आरोपों से बरी किया है।
अभियोग पक्ष के मुताबिक़, 16 जनवरी, 1997 को डॉ. दत्ता सामंत पवई से घाटकोपर के पंतनगर जा रहे थे। इसी दौरान पद्मावती रोड पर स्थित नरेश जनरल स्टोर के पास उन पर जानलेवा हमला हुआ। जिसके वजह से उनकी जान चली गई।
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अदालत ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण गवाह मुकर गए। उन्होंने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया। अन्य गवाहों की गवाही आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।''
सीबीआई अदालत ने कहा कि यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि राजन, जिसका असली नाम राजेंद्र सदाशिव निकालजे है, ने साजिश रची। इस फैसले के बाद भी गैंगस्टर के जेल से रिहा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि वह विभिन्न शहरों में दर्जनों मामलों में मुकदमे का सामना कर रहा है।
सामंत ने 1981 में मुंबई में कपड़ा मिल श्रमिकों की हड़ताल का आयोजन किया था। सामंत की 16 जनवरी 1997 को गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वह अपनी जीप से उपनगरीय घाटकोपर में पंत नगर स्थित अपने कार्यालय जा रहे थे। मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने 17 राउंड फायरिंग की। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि राजन ने हत्या की साजिश रची थी। लेकिन, विशेष न्यायाधीश ए एम पाटिल ने शुक्रवार को फैसले में कहा कि ऐसा कुछ भी प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि राजन ने साजिश रची थी। (भाषा इनपुट के साथ)