उदयनिधि स्टालिन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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सनातन धर्म पर टिप्पणी मामले पर उदयनिधि को राहत, SC ने नई FIR दर्ज होने पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री एम उदयनिधि स्टालिन की ‘‘सनातन धर्म को खत्म करने'' संबंधी टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गोस्वामी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को आदेश दिया कि तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री एम उदयनिधि स्टालिन की ‘‘सनातन धर्म को खत्म करने'' संबंधी टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए।

इस बाबत प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने सनातन धर्म पर टिप्पणी के संबंध में उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ दर्ज मामलों में उन्हें बलपूर्वक कार्रवाई से संरक्षण देने वाले अंतरिम आदेश की वैधता की अवधि बढ़ा दी। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता ने सितंबर 2023 में एक सम्मेलन में कहा था कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है और इसका ‘‘उन्मूलन'' किया जाना चाहिए।

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जानकारी दें कि, उन्होंने सनातन धर्म की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू से करते हुए कहा था कि इसे नष्ट कर दिया जाना चाहिए। स्टालिन की इस टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू और कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।

जानकारी दें कि, बीते 5 मार्च बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने लोकसभा सीट के परिसीमन पर यहां एक सर्वदलीय बैठक में दक्षिणी राज्यों के सांसदों और पार्टी प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के गठन का प्रस्ताव रखा। वहीं यह प्रस्ताव पेश करते हुए स्टालिन ने कहा कि संसद में सीट की संख्या में वृद्धि की स्थिति में 1971 की जनगणना को इसका आधार बनाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा था कि 2026 से 30 वर्षों के लिए लोकसभा सीट के परिसीमन को लेकर 1971 की जनगणना को आधार बनाया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संसद में इस बारे में आश्वस्त करना चाहिए।

दरइसल हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि, परिसीमन की प्रक्रिया तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों को प्रभावित नहीं करेगी। उन्होंने स्टालिन पर इस मामले पर गलत सूचना अभियान चलाने का आरोप लगाया था। वहीं अटकलों पर विराम लगाते हुए शाह ने कहा था कि जब आनुपातिक आधार पर परिसीमन किया जाएगा तो किसी भी दक्षिणी राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आएगी।तमिलनाडु के अलावा कांग्रेस शासित कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों क्रमशः सिद्धरमैया और ए. रेवंत रेड्डी ने भी परिसीमन पर शाह के बयान को लेकर सवाल उठाया था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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