TVK MLA Sethupathi Barred From Floor Test: तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले सीएम विजय को झटका लगा है। विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने से पहले जहां एक ओर AIADMK के नेता CV शनमुगम टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया था, वहीं मद्रास हाई कोर्ट ने विजय को झटका देते हुए पार्टी के एक विधायक को विधानसभा की कार्रवाई में भाग लेने पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक वोट से जीत हासिल करने वाले टीवीके विधायक अब फ्लोर टेस्ट में उपस्थित नहीं रहेंगे। ऐसे में विधानसभा में TVK पार्टी के विधायकों की संख्या घटकर अब 107 ही रह जाएगी। आर श्रीनिवास सेतुपति ने डीएमके नेता नेता के आर पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हराया था, जोकि काफी चर्चा में बना था।
बता दें कि चुनावी नतीजे आने के बाद DMK उम्मीदवार और राज्य में पूर्व मंत्री के आर पेरियाकरुप्पन ने तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज करने वाले टीवीके विधायक आर सेतुपति की इस जीत को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया था कि 4 मई को वोट गिनती के दौरान एक पोस्टल बैलेट की गिनती नहीं हुई, क्योंकि वह अन्य विधानसभा क्षेत्र में चला गया था। इस वजह से उनको हार मिली। डीएमके नेता ने वोट गिनती के दौरान अन्य अनियमितताओं का भी आरोप लगाया।
हाई कोर्ट ने डीएमके नेता की याचिका स्वीकार कर ली। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की पीठ ने माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला बनता है। सुनवाई में हाई कोर्ट ने TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को वोट करने, किसी भी प्रकार के फ्लोर टेस्ट जैसे विश्वास प्रस्ताव, विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव या सदन की संख्या बल जुड़े किसी भी मतदान प्रक्रिया में शामिल होने पर रोक लगा दी है। यह अगले आदेश तक प्रभावी होगा।
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तमिलनाडु के तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र से टीवीके नेता आर श्रीनिवास सेतुपति ने जीत दर्ज की है। इस चुनाव में डीएमके उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन को महज 1 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। मंगलावर को मद्रास हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए विधानसभा चुनाव में एक वोट से जीते TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने पर रोक लगा दी है।
बता दें कि तमिलनाडु की तिरुपत्तूर विधानसभा के चुनावी नतीजे ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इस पर लिखा था, इस नतीजे को स्कूलों में भी पढ़ाया जाना चाहिए, जिससे कि सभी को एक वोट की कीमत पता चले। इससे बच्चे मताधिकार का महत्व समझेंगे।