सेंथिल बालाजी-सुप्रीम कोर्ट  
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सेंथिल बालाजी केस में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- जमानत मिलने के बाद मंत्री बनाना 'बेहद गलत'

सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सेंथिल बालाजी का जमानत आदेश वापस लेने की याचिका पर फिर सुनवाई की। कोर्ट ने मामले पर आज कहा कि, जमानत मिलने के कुछ दिनों बादमंत्री नियुक्त किया जाना 'बहुत गलत था।

राहुल गोस्वामी

नई दिल्ली: आज यानी शुक्रवार को जहां सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सेंथिल बालाजी का जमानत आदेश वापस लेने की याचिका पर फिर सुनवाई की। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर आज कहा कि, द्रमुक नेता वी सेंथिल बालाजी को नौकरी के बदले नकदी 'घोटाले' से जुड़े धन शोधन मामले में जमानत मिलने के कुछ दिनों बाद तमिलनाडु सरकार में मंत्री नियुक्त किया जाना 'बहुत गलत' था।

इस बाबत जस्टीस अभय एस ओका और जस्टीस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि बड़ी संख्या में गवाह सरकारी अधिकारी थे। वहीं बेंच ने बालाजी के खिलाफ लंबित मामलों पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया। उसने कहा, ‘‘ये अपने आप नहीं हो सकता कि जैसे ही कोई व्यक्ति रिहा होता है, वह मंत्री बन जाता है, इसमें कुछ बहुत ही गलत है। क्योंकि ऐसे मामले हो सकते हैं जहां किसी को फंसाया जा रहा हो। मामले के तथ्यों पर हमें विचार करना होगा।''

इसके साथ ही बेंच ने ‘‘मामलों में जिन गवाहों से पूछताछ की जानी है, उनकी संख्या का रिकॉर्ड'' मांगा। उसने कहा, ‘‘वे यह भी बताएंगे कि अपराध के कितने गवाह पीड़ित हैं और कितने लोक सेवक हैं जो गवाह हैं।''

वहीं आज शीर्ष अदालत ने लंबित मुकदमों के विवरण पर भी गौर किया और पाया कि जिन आम लोगों से पैसा लिया गया था, सरकारी अधिकारियों के अलावा वे सभी गवाह थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बालाजी का ‘काफी प्रभाव' था। उन्होंने कहा, ‘‘जेल में रहने के दौरान भी बालाजी बिना विभाग के मंत्री थे। वह राज्य में इतनी ताकत रखते हैं।''

सॉलिसिटर जनरल मेहता की दलील का जवाब देते हुए बालाजी की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके पास किसी राज्य में बिना विभाग के भी बहुत अधिक शक्ति है।'' इस पर मेहता ने कहा, ‘‘यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है। इसे अदालत ही रहने दीजिए।'' पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 जनवरी 2025 की तारीख निर्धारित की।

जानकारी दें कि सेंथिल बालाजी को बीते 26 सितंबर को मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया था। वहीं कोर्ट ने इस मामले पर भी फिर हैरानी जताई है कि बेल मिलने के तुरंत बाद तमिलनाडु सरकार में वी. सेंथिल बालाजी को मंत्री पद मिल गया। ऐसे में कोर्ट चिंतीत है कि कहीं इस मामले में गवाह किसी दबाव में ने आ जाएं। (एजेंसी इनपुट के साथ)

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