सर्वोच्च न्यायालय   फोटो सोर्स- सोशल मीडिया
देश

बिना जुर्म जेल में बिताए 22 साल…सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति, ओडिशा हाई कोर्ट को लगाई फटकार

Supreme Court Criticises Odisha HC: 22 साल बाद ओडिशा का कैदी जेल से रिहा होगा। हाई कोर्ट के रुख पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। SC ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर दी युवक को जमानत दी।

अमन मौर्या

SC Grants Bail Odisha Life Convict 22 Years: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है, जो पिछले 22 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद था। अदालत ने उड़ीसा हाई कोर्ट के उस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें लगभग नौ साल की देरी से दायर की गई आपराधिक अपील को खारिज कर दिया गया था।

इस फैसले को ‘बेहद चिंताजनक’ बताते हुए न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट को ‘व्यावहारिक दृष्टिकोण’ अपनाना चाहिए था और कम से कम दोषी को उसकी अपील पर मेरिट के आधार पर बहस करने का अवसर देना चाहिए था।

2016 में कोर्ट ने माफी से किया था इनकार

शीर्ष अदालत अर्जुन जानी उर्फ टुनटुन द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका ओडिशा हाई कोर्ट के 11 जनवरी 2016 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें हत्या के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर आपराधिक अपील में 3,157 दिनों की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पर ओडिशा के नबरंगपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा चलाया गया था।

उसे 25 अगस्त 2006 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने अपील को समयसीमा से बाहर बताते हुए कहा था, यह अपील 3157 दिन की देरी से दायर की गई है। जेल से भेजे गए अपील मेमो में हमें देरी माफ करने का कोई ठोस कारण नहीं मिला। देरी माफी आवेदन खारिज किया जाता है और अपील भी खारिज की जाती है।

ओडिशा हाई कोर्ट के रवैये पर SC ने जताई आपत्ति

ओडिशा हाई कोर्ट के इस रवैये पर आपत्ति जताते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि जब अपील दायर की गई थी, तब याचिकाकर्ता 12 वर्ष से अधिक की सजा काट चुका था और यह तथ्य कि अपील जेल के माध्यम से दायर की गई थी, हाई कोर्ट को सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाने के लिए पर्याप्त था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को देरी माफ करने से इनकार करते समय इस तथ्य पर विचार करना चाहिए था कि याचिकाकर्ता पहले ही 12 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका था। अदालत को यह भी देखना चाहिए था कि यह जेल अपील थी। केवल यही बात हाई कोर्ट को व्यावहारिक या सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने के लिए पर्याप्त थी, ताकि कम से कम याचिकाकर्ता को अपनी आपराधिक अपील पर मेरिट के आधार पर बहस करने का एक अवसर मिल सके।

याचिकाकर्ता के वकील ने दिया तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोरापुट सर्कल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक द्वारा जारी आचरण प्रमाणपत्र भी अदालत के समक्ष पेश किया। इसमें कहा गया था कि कैदी का जेल में व्यवहार और आचरण संतोषजनक रहा है तथा उसके खिलाफ कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी या दंड दर्ज नहीं किया गया। लंबी कैद और जेल में संतोषजनक आचरण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हम आश्वस्त हैं कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

SC ने अनुच्छेद 142 के तहत दिया आदेश

न्यायमूर्ति पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए एक असाधारण मामले के रूप में हम आदेश देते हैं कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जेल अधीक्षक की संतुष्टि के अनुसार 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए।

साथ ही, शीर्ष अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को लागू रिमिशन नीति के तहत सजा में छूट के लिए उचित आवेदन तैयार करने में सहायता प्रदान करे। पीठ ने कहा कि हमने यह आदेश इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पारित किया है कि याचिकाकर्ता 22 वर्ष से अधिक समय से सजा काट रहा है और इस दौरान उसे एक बार भी रिहा नहीं किया गया। जेल में उसका आचरण भी संतोषजनक पाया गया है। मामले को अनुपालन रिपोर्ट के लिए 28 मई को सूचीबद्ध किया गया है।

एजेंसी इनपुट के साथ…

भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण ने पकड़ी रफ्तार; अब सिर्फ 269 किमी ट्रैक बाकी, 2027 में पूरा होगा ब्रॉडगेज नेटवर्क

आज की ताजा खबर 11 अगस्त LIVE: रांची: पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे BJP कार्यकर्ता

बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब, जारी किया नोटिस

चर्चा से भाग रहा है विपक्ष जंतर-मंतर और राम मंदिर विवाद पर लोकसभा-राज्यसभा ठप, जानिए संसद में आज क्या-क्या हुआ

PM मोदी से मिले सुप्रिया सुले और NCP-SP के 8 सांसद, 15 मिनट की मुलाकात में उठे महाराष्ट्र के 8 अहम मुद्दे