Supreme Court On West Bengal SIR Case: सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) को उन लोगों की अपील के निपटारे की जानकारी देने का निर्देश दिया है, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में ECI की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया है। यह नोटिस कांग्रेस (INC) नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर जवाब मांगने के लिए जारी किया गया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के हर ब्लॉक में SIR ट्रिब्यूनल बनाने और अपीलों का समय पर निपटारा करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के SIR पर फैसले पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, बंगाल में SIR के कारण चुनाव आयोग के मुताबिक 27 लाख लेकिन असल में 34 लाख आम लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हैं। बंगाल हाईकोर्ट जज ने खुद स्वीकार किया कि जिस रफ्तार से केस का फैसला होता है उसमें कम से कम 21 साल लगेगा इससे पूरा परिवार बेहाल होता है। अगर लिस्ट में नाम ना हो तो राशन बंद हो जाता है, कोई लाभ नहीं मिलता।
मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अगर मामले की लेकर बनाई गई ट्रिब्यूनल का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं है, इसके काम करने के तरीके में बदलाव किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा इस मामले में अब काफी समय बीत चुका है, इसलिए अब यह देखने की आवश्यकता है कि ट्रिब्यूनल ने अब तक कितने मामलों को निपटारा किया है। कोर्ट की इस टिप्पणी पर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वो जल्द ही इससे जुड़ा पूरा डाटा कोर्ट के सामने पेश करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने जजों की मौखिक टिप्पणियों के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुनवाई के दौरान जजों की मौखिक टिप्पणियों और संकेतों को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।
याचिका में देश में फर्जी वकीलों और फर्जी कानून की डिग्रियों की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। इसमें पूरे मामले की CBI जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।