कर्नाटक के पूर्व CM एसएम कृष्णा, फोटो - सोशल मीडिया 
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कर्नाटक के पूर्व CM एसएम कृष्णा का निधन, अपने आवास पर ली अंतिम सांस

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का निधन हो गया है। एसएम कृष्णा ने अपने आवास पर सुबह 2:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को आज मद्दुर ले जाया जाएगा। वे साल 1999 से 2004 कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और...

विकास कुमार उपाध्याय

बेंगलुरु : कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का निधन हो गया है। एसएम कृष्णा ने अपने आवास पर सुबह 2:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को आज मद्दुर ले जाया जाएगा। एसएम कृष्णा का पूरा नाम सोमनाहल्ली मल्लैया कृष्णा है। वे विदेश मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भी रह चुके थे।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि एसएम कृष्णा का जन्म 1932 में हुआ था। वे साल 1999 से 2004 कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और वर्ष 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे थे। 22 मई 2009 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एसएम कृष्णा को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया और 23 मई 2009 को उन्हें विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जानिए एमएस कृष्णा की शुरुआती करियर

एसएम कृष्णा का जन्म कर्नाटक के मांड्या जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम एस सी मल्लैया था। कृष्णा ने अपनी शुरुआती शिक्षा मैसूर के महाराजा कॉलेज से प्राप्त की, जहां से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने बैंगलोर के सरकारी कॉलेज से लॉ की डिग्री ली। उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए, जहां उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की और बाद में अंतरराष्ट्रीय कानून में शिक्षा देने लगे। अमेरिका में रहते हुए उनकी राजनीति में रुचि बढ़ी और उन्होंने जॉन एफ कैनेडी के राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार भी किया। 1962 में वे कर्नाटक विधानसभा के सदस्य चुने गए। 29 अप्रैल, 1964 को उनकी शादी प्रेमा से हुई।

कैसा रहा एमएस कृष्णा की राजनीतिक करियर

एस एम कृष्णा कर्नाटक के मांड्या से कई बार सांसद चुने गए। उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के शासनकाल में मंत्री के रूप में कार्य किया। 1983-84 के दौरान वे इंदिरा गांधी के समय में और 1984-85 के बीच राजीव गांधी के समय में उद्योग और वित्त राज्य मंत्री रहे। 1996 और 2006 में उन्हें राज्यसभा सदस्य चुना गया। इसके अलावा, वे कर्नाटक विधानसभा के सदस्य भी रहे और 1989-1992 तक विधानसभा के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। 1999 में वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने और राज्य में पार्टी को जीत दिलाई।

2004 तक वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान उन्होंने सरकारी-निजी साझेदारी (PPP) का समर्थन किया। उनके कार्यकाल में राज्य में कई विकास कार्य हुए और उनकी राजनीति में स्थिरता और प्रभाव का दौर रहा।

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