RSS प्रमुख मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया) 
देश

'विश्वगुरु बनना हमारी महत्वाकांक्षा नहीं, दुनिया की जरूरत', RSS चीफ ने बताया संघ का असली मकसद

Mohan Bhagwat: मोहन भागवत ने कहा कि संघ व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर देकर और स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में भेजकर सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

मनोज आर्या

RSS Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को हिंदुओं से एकजुट होकर सनातन धर्म को और ऊंचाइयों पर ले जाने की अपील की। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में आयोजित 'विश्व संघ शिविर' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देना है।

इसी संदर्भ में उन्होंने ‘विश्वगुरु’ की अवधारणा पर बात करते हुए कहा कि भारत का विश्वगुरु बनना कोई उसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि विश्व को इसकी आवश्यकता है। हालांकि, यह स्वतः नहीं होता, इसके लिए निरंतर और कठोर परिश्रम की जरूरत है, जो विभिन्न धाराओं के माध्यम से चल रहा है, जिसमें संघ भी एक महत्वपूर्ण धारा है। संघ इस लक्ष्य की दिशा में सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयासों से निरंतर कार्य कर रहा है।

'सनातन धर्म और हिंदुत्व एक-दूसरे के पर्यायवाची'

आरएसएस प्रमुख ने बीसवीं शताब्दी के आध्यात्मिक नेता योगी अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान का विचार बहुत पहले ही व्यक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि एक सदी पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया अब संकल्प और सामूहिक प्रयास से आगे बढ़ानी है। मोहन भागवत ने कहा कि वह समय अब आ गया है। 100 वर्ष पहले जब योगी अरविंद ने घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान ईश्वर की इच्छा है और हिंदू राष्ट्र का उदय सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए है। अपने भाषण में  जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत, हिंदू राष्ट्र, सनातन धर्म और हिंदुत्व एकदूसरे के पर्यायवाची हैं। योगी अरविंद ने एक शताब्दी पहले संकेत दिया था कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब हमें उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। अब समय आ गया है कि सभी हिंदू एकजुट होकर सनातन धर्म का उत्थान करें।

हिंदू समाज को संगठित करना उद्देश्य

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत और विदेशों में संघ से जुड़े संगठन एक ही उद्देश्य साझा करते हैं- हिंदू समाज को संगठित करना और मूल्य आधारित, अनुशासित जीवन का उदाहरण विश्व के सामने प्रस्तुत करना। भारत की वैश्विक भूमिका पर बोलते हुए मोहन भागवत ने जोर दिया कि विश्वगुरु बनने के लिए कई क्षेत्रों में निरंतर प्रयास की जरूरत है।

मोहन भागवत ने कहा कि संघ व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर देकर और स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में भेजकर सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आज संघ से जुड़े लोगों के कार्यों की हर जगह सराहना हो रही है और समाज का उन पर विश्वास बढ़ा है।

PM मोदी-ट्रंप की फोन पर बात, भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर क्या हुई चर्चा?

हवा में चाकूबाजी, तेजी से नीचे आया विमान…कौन हैं भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार? जान पर खेलकर बचाई 180 की जान

यूपी पुलिस को ही भंग कर सभी केस CBI को देने पड़ेंगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कांग्रेस की एकला चलो नीति पर भड़के उद्धव ठाकरे! INDIA गठबंधन की बैठक में सुनाई खरी-खोटी, दी ये सलाह

CSR घाेटाला: महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों के 8 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी नेटवर्क का खुलासा