रेलवे सुरक्षा बल स्थापना दिवस  (सोर्स- सोशल मीडिया)
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क्यों की गई थी रेलवे सुरक्षा बल की स्थापना, IB को करनी पड़ी थी सिफारिश, जानिए पूरा इतिहास

RPF History India: भारतीय रेलवे हर साल 20 सितंबर को आरपीएफ स्थापना दिवस मनाती है। जानिए आजादी से पहले की 'वॉच एंड वार्ड' व्यवस्था से लेकर आरपीएफ के सशस्त्र बल बनने तक का पूरा इतिहास।

अक्षय साहू

RPF Foundation Day: भारतीय रेलवे हर साल 20 सितंबर को रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की स्थापना दिवस के रूप में मनाती है। भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था आज जिस रूप में दिखाई देती है, उसके पीछे कई दशकों का इतिहास है। रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की स्थापना किसी एक घटना के कारण नहीं हुई थी। रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा, माल की चोरी और पिलेज (माल की चोरी या नुकसान) जैसी समस्याओं से निपटने के लिए लंबे समय तक प्रयास किए गए। इन्हीं प्रयासों के बाद एक संगठित रेलवे सुरक्षा बल की नींव पड़ी। 

आजादी से पहले रेलवे में Watch and Ward नाम की सुरक्षा व्यवस्था थी। इसका मुख्य काम रेलवे के माल, गुड्स शेड, यार्ड, वैगन और दूसरी रेलवे संपत्तियों की निगरानी करना था। 1872 में रेलवे पुलिस समिति ने भी सुझाव दिया था कि रेलवे पुलिस और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारियां अलग-अलग होनी चाहिए। इसके बाद 1921 में Watch and Ward व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई। इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इसे एक वरिष्ठ अधिकारी के नियंत्रण में संगठित किया गया।

1950 के दशक में क्यों बढ़ी चिंता

आजादी के बाद भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया। रेलवे के जरिए माल की आवाजाही बढ़ने लगी। इसके साथ ही रेलवे की संपत्ति और माल की सुरक्षा करना भी बड़ी चुनौती बन गया। रेलवे में चोरी और माल के नुकसान के कारण आर्थिक नुकसान हो रहा था। इसके अलावा यात्रियों और कारोबारियों की ओर से किए जाने वाले मुआवजे के दावों का बोझ भी रेलवे पर बढ़ रहा था।

इन्हीं समस्याओं को समझने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 1950 के दशक की शुरुआत में जांच और अध्ययन किए गए। रेलवे के आधिकारिक इतिहास में 1954 के मलिक स्टडी (Mullick Study) को रेलवे की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्ययन माना गया है।

1985 में हुई थी आरपीएफ की स्थापना

RPF की स्थापना में IB की क्या भूमिका थी?

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक के माध्यम से भी अध्ययन कराया गया था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि रेलवे में चोरी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं क्यों हो रही हैं और क्या उस समय की Watch and Ward व्यवस्था इनसे निपटने के लिए पर्याप्त थी।

IB के अध्ययन में क्या बात सामने आई?

IB अध्ययन के बाद यह जरूरत महसूस हुई कि रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए केवल सामान्य निगरानी व्यवस्था पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी थी, जिसे स्पष्ट कानूनी अधिकार मिले और जिसकी जिम्मेदारियां तय हों।

हालांकि, यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि IB ने सीधे RPF बनाने का आदेश दिया था। ज्यादा सटीक बात यह है कि 1954 के मलिक स्टडी  ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को सामने रखा। इसमें Watch and Ward व्यवस्था को अधिक संगठित, प्रभावी और कानूनी आधार देने की जरूरत पर जोर दिया गया। रेलवे के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी इस अध्ययन को सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम पड़ाव माना गया है।

रेलवे का अबह हिस्सा है आरपीएफ

1957 में RPF Act से मिला कानूनी आधार

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया में अगला बड़ा कदम 1957 में उठाया गया। इसी साल संसद ने रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 बनाया। इस कानून के जरिए रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक संगठित बल को कानूनी पहचान मिली। RPF की मुख्य जिम्मेदारी रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा करना और उससे जुड़े अपराधों पर रोक लगाने की व्यवस्था को मजबूत करना था।

अपने बच्चे को साथ लेकर ड्यूटी आरपीएफ कर्मचारी

20 सितंबर 1985 को मिली मंजूरी

समय के साथ रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका और अधिकारों में भी बदलाव किए गए। साल 1985 में 20 सितंबर के दिन कानून में संशोधन करके RPF को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा दिया गया। इस बदलाव के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में RPF की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई।  

रेलवे सुरक्षा बल की स्थापना की कहानी केवल 1957 में कानून बनने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे आजादी से पहले की Watch and Ward व्यवस्था, रेलवे में चोरी और माल के नुकसान की समस्याएं, 1954 का Mullick Study और IB से जुड़ी सुरक्षा समीक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं।

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