Rahul Gandhi on Gyanesh Kumar Row: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के एक बयान का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने केंद्र सरकार में सेवारत IAS अधिकारी रहते हुए बीजेपी के लिए लोगों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने का काम किया था।
राहुल गांधी ने केरल कांग्रेस के एक वीडियो को सोशल मीडिया पर रिपोस्ट किया। वीडियो में पूर्व केरल मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ज्ञानेश कुमार से जुड़ा एक कथित घटनाक्रम बता रहे हैं।
केरल कांग्रेस के मुताबिक, जिजी थॉमसन ने दावा किया कि जब वह 2015-16 के दौरान केरल के मुख्य सचिव थे, तब एक फ्लाइट यात्रा के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उनसे 2019 का लोकसभा चुनाव BJP के टिकट पर लड़ने को लेकर पूछा था।
दावे के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने थॉमसन से पठानमथिट्टा लोकसभा सीट से BJP उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने में उनकी रुचि के बारे में पूछा था। थॉमसन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
राहुल गांधी ने इस दावे को चुनाव आयोग को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल BJP के लिए 'भर्ती' करने में किया गया और बाद में उन्हें चुनावों का 'अंपायर' बना दिया गया।राहुल गांधी ने चुनावों में 'मैच फिक्सिंग' की जिम्मेदारी सौंपे जाने का भी आरोप लगाया।
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। वह मई 2016 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के कश्मीर डिवीजन में संयुक्त सचिव नियुक्त हुए थे। 2019 में अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद वह जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक की तैयारी से जुड़े थे। बाद में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उनके कार्यकाल में SIR समेत चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर यह नया विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया था।