Highlights:
आज प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के 1 साल पूरे
देश के 1.7 करोड़ किसानों की बदल रही है किस्मत
योजना में है किसानों से जुड़ी 36 योजनाओं का संगम
एक साल में दिख रहे हैं ऐसे बदलाव
PM Dhan Dhanya Krishi Yojana Benefits: केंद्र सरकार की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) ने सफलतापूर्वक अपना 1 साल पूरा कर लिया है। 11 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई इस योजना का मकसद देश के उन इलाकों में खेती-किसानी की तस्वीर बदलना है, जो अब तक विकास की दौड़ में थोड़े पीछे छूट गए थे।
नीति आयोग के 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' की तर्ज पर शुरू की गई यह देश की पहली ऐसी योजना है, जो खास तौर पर कृषि के क्षेत्र में पिछड़े जिलों के चौमुखी विकास पर ध्यान दे रही है। केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित और 16 जुलाई 2025 को कैबिनेट से मंजूर इस योजना को आज 11 अक्टूबर 2026 को पूरे 12 महीने हो चुके हैं।
पीएम धन-धान्य कृषि योजना कोई छोटे-मोटे बजट वाली योजना नहीं है, बल्कि यह एक लंबे समय के लिए तैयार किया गया बड़ा विज़न है। सरकार ने इस योजना के लिए कुल 6 वर्षों की समय-सीमा तय की है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 से लेकर 2030-31 तक चलेगी। तब जाकर किसानों की असली स्थिति का पता चलेगा।
इस पूरी अवधि के दौरान योजना पर कुल 1,44,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत हर साल 24,000 करोड़ रुपए का बड़ा बजट जारी किया जा रहा है। इस पैसे का सही इस्तेमाल हो, इसके लिए बजटीय संसाधनों को चार हिस्सों में बांटा गया है, जिससे किसानों की हर तरह से मदद करने की कोशिश की जाएगी...
पहला- 40% सब्सिडी के लिए
दूसरा- 30% बुनियादी ढांचे के विकास के लिए
तीसरा 20% लोन या कर्ज सहायता के लिए
चौथा- 10% किसानों की ट्रेनिंग व बाजार तक पहुंच बनाने के लिए
इस योजना के केंद्र में देश के छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। भारत में ऐसे किसानों की आबादी कुल कृषि आबादी का लगभग 86% है। इस योजना से सीधे तौर पर देश के लगभग 1.7 करोड़ किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
जिलों के चयन में किसी तरह का पक्षपात न हो, इसके लिए नाबार्ड (NABARD) और वित्तीय सेवा विभाग ने 3 कड़े और वैज्ञानिक मापदंड तय किए हैं। इसमें सबसे पहली क्राइटेरिया ये है कि जिन जिलों की फसल की पैदावार राष्ट्रीय औसत से कम दिखायी दे रही है।
दूसरी क्राइटेरिया के अनुसार उन जिलों को लिया जा रहा है, जहां पर फसल सघनता 155% से कम है। इसका मतलब साफ है कि इन जिलों में साल में औसतन 1.5 बार भी फसल नहीं ली जाती है। तीसरी क्राइटेरिया और भी खास है, जिसके अनुसार इस योजना में उन जिलों को रखा जा रहा है, जहां बैंकों से किसानों को लोन बहुत कम मिला है। साथ ही इस बात का खास ध्या रखा गया है कि देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिला इसमें जरूर शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश के 12 जिले : महोबा, सोनभद्र, हमीरपुर, बांदा, जालौन, झांसी, उन्नाव, प्रयागराज, चित्रकूट, प्रतापगढ़, श्रावस्ती और ललितपुर।
महाराष्ट्र के कुल 9 जिले: रायगढ़, धुले, छत्रपति संभाजीनगर, बीड, नांदेड़, यवतमाल, चंद्रपुर और गढ़चिरौली ।
मध्य प्रदेश के कुल 8 जिले: अनूपपुर, डिंडौरी, आलीराजपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, निवाड़ी और टीकमगढ़।
राजस्थान के कुल 8 जिले: बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, पाली, जालोर और चूरू।
बिहार के कुल 7 जिले: मधुबनी, दरभंगा, बांका, गया, सिवान, किशनगंज और नवादा।
अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर आदि से भी कुल मिलाकर 100 जिले इस सूची में शामिल हैं।
पीएम धन-धान्य कृषि योजना की सबसे खास बात इसका एकीकरण है। अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए सरकार ने 11 केंद्रीय मंत्रालयों की 36 पुरानी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया है। इसमें पीएम-किसान, पीएम कृषि सिंचाई योजना और पीएम फसल बीमा योजना जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही पशुपालन, डेयरी और मछली पालन को भी इससे जोड़ा गया है।
इस पूरे तंत्र का मकसद 5 मुख्य लक्ष्यों को हासिल करना है...
आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों से पैदावार बढ़ाना।
'प्रति बूंद अधिक फसल' के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देना।
फसल की बर्बादी रोकने के लिए गांव-गांव कोल्ड स्टोरेज और गोदाम बनाना।
पारंपरिक खेती की जगह नकदी फसलों, मोटे अनाज (मिलेट्स) और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से आसानी से लोन दिलाना ताकि किसान साहूकारों के कर्ज के जाल से बच सकें।
योजना में ढिलाई न हो, इसके लिए 117 पैमाने बनाए गए हैं और हर महीने डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए नीति आयोग इसकी समीक्षा करता है। इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले ने जमीनी स्तर पर बेहतरीन काम करके देश भर में 7वीं रैंक हासिल की है। अगर आंकड़ों की बात करें तो देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 में जो 18.85 था, वह अगस्त 2026 तक बढ़कर 46.89 हो गया। यानी केवल चार महीनों में 28.04 अंकों की बड़ी बढ़त दर्ज की गई।
इसके अलावा अलग-अलग पैमानों पर भी बड़ा सुधार देखने को मिला है...
कृषि उत्पादकता का स्कोर 1.50 से बढ़कर 8.08 पहुंच गया।
फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती का स्कोर 4.08 से बढ़कर 10.18 हुआ।
भंडारण और गोदाम सुविधा का स्कोर 2.14 से बढ़कर 5.19 हुआ।
सिंचाई सुविधा का स्कोर 1.38 से सुधरकर 4.91 हो गया।
खेती बाड़ी के लिए लोन की उपलब्धता का स्कोर 2.40 से बढ़कर 6.53 पहुंचा।
बेहतर शासन और सेवाओं की डिलीवरी का स्कोर 7.41 से बढ़कर 12.05 दर्ज किया गया।
इस तरह से कुल मिलाकर देखें तो प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना महज एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे पिछड़े ग्रामीण इलाकों में कृषि क्रांति की एक ठोस बुनियाद है। 1.44 लाख करोड़ रुपए का निवेश और 1.7 करोड़ किसानों का भरोसा यह साबित करता है कि आने वाले समय में भारत का अन्नदाता और ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर जरुर बनेगा।