प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौजन्य-IANS
देश

परिवार उजड़ गए, कई जिंदगियां तहस-नहस... विभाजन विभीषिका पर पीएम मोदी ने याद दिलाया इतिहास का वो काला पन्ना

PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर श्रद्धांजलि अर्पित की और नागरिकों से एकता को मजबूत करने तथा विकसित भारत की दिशा में मिलकर काम करने का आग्रह किया।

प्रिया जैस

Partition Horrors Remembrance Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कहा कि उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन करता हूं, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' में कहा, "आज हम 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही।"

पीएम मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर दिया संदेश

पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, "इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई, चुनौतियों को कामयाबी में बदला और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया। उनकी जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जब्जे की ताकत की याद दिलाती हैं।"

आपसी सद्भाव और भाईचारे बनाए रखने का संकल्प

उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन हमारे देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को अधिक मजबूत करे और हम सब मिलकर 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में काम करें।

एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।"

संस्कृत सुभाषितम् का श्लोक

इस अवसर पर उन्होंने 'संस्कृत सुभाषितम्' भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, "उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।"

'संस्कृत सुभाषितम्' में कहा गया है, "परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं व सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए, मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।"

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