Highlights:
सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के लिए अक्टूबर में संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
सरकार ने अपने सहयोगियों के साथ-साथ छोटे दलों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के वोटों की आवश्यकता होती है।
Parliament Special Session: संसद के एक संभावित विशेष सत्र को लेकर अहम खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इस महीने एक विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए यह सत्र बुला सकती है। गौरतलब है कि सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को सत्रावसान नहीं किया है।
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए चर्चा संभव है। इस समय सरकार के पास जरूरी संख्या बल भी मौजूद है। दावा है कि इस मामले पर कुछ छोटे विपक्षी दलों के साथ सरकार की बाचचीत शुरू हो चुकी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अपने सहयोगियों के साथ-साथ छोटे दलों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। इस बार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर सभी की सहमति बनानी शुरू कर दी है। 17 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान ऐसा ही एक विधेयक निष्प्रभावी (लैप्स) हो गया था। अब सरकार समर्थन के लिए DMK और कुछ छोटे विपक्षी दलों से बातचीत कर रही है।
सदन के सत्रावसान और अगले सत्र की शुरुआत के बीच के समय को 'सत्र-अंतराल' कहा जाता है। कांग्रेस ने पहले कहा था कि विपक्ष के लिए यह एक सफलता है कि सरकार 'संदिग्ध' दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही, जिससे परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।
कांग्रेस पार्टी ने मांग की थी कि लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या 543 को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाए। साथ ही, यह प्रस्ताव भी दिया कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू किया जाए।
17 अप्रैल को संसद के बजट सत्र के दौरान, मोदी सरकार को एक बड़ा झटका लगा। संविधान संशोधन विधेयक जो परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है और जिसका उद्देश्य लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है। हालांकि, विधेयक निचले सदन (लोकसभा) में पारित नहीं हो सका।
लोकसभा में इस विधेयक पर हुई वोटिंग के दौरान, हिस्सा लेने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। किसी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के वोटों की आवश्यकता होती है, जो कि दो-तिहाई बहुमत के बराबर है।