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ओडिशा में शिक्षक भर्ती पर बढ़ा बवाल, 6 दिनों के प्रदर्शन के बाद अब भूख हड़ताल और कैंडल मार्च का ऐलान

Odisha Protest: ओडिशा में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर 6 दिनों से विरोध कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब भूख हड़ताल और कैंडल मार्च का फैसला किया है।

अनन्या तिवारी

Odisha Teacher Aspirants Hunger Strike: ओडिशा में सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पदों पर तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की अपनी इकलौती मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। शनिवार को इस आंदोलन का छठा दिन था, लेकिन सरकार के साथ हुई वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रहने के बाद अभ्यर्थियों ने अब भूख हड़ताल पर जाने का बड़ा फैसला कर लिया है। भुवनेश्वर के लोअर पीएमजी में प्रदर्शन कर रहे इन युवाओं का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

क्या है शिक्षक अभ्यर्थियों की मुख्य मांग?

प्रदर्शनकारी शिक्षक अभ्यर्थियों का साफ तौर पर कहना है कि उनकी मांग बेहद सीधी और स्पष्ट है, सरकारी स्कूलों में जो शिक्षक पद खाली पड़े हैं, उन पर तुरंत नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि ओडिशा राज्य सरकार उनकी खराब स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है, लेकिन इसके बावजूद वह भर्ती निकालने को लेकर कोई संजीदगी नहीं दिखा रही है। इन युवाओं का कहना है कि उन्होंने शिक्षक बनने के लिए जरूरी शिक्षा और आवश्यक प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है, लेकिन इसके बाद भी वे सिर्फ सरकारी नौकरी की घोषणा का इंतजार करने के लिए मजबूर हैं।

'मजबूर नहीं कर सकते'... सरकार के इस तर्क से भड़का आक्रोश

बातचीत के दौरान सरकार की ओर से जो रुख अपनाया गया, उसने आंदोलनकारियों के गुस्से को और ज्यादा बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सरकारी प्रतिनिधियों ने बातचीत में स्पष्ट कहा है कि राज्य में पहले ही लगभग 26 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए फिलहाल इससे अधिक किसी भी नई भर्ती की घोषणा नहीं की जाएगी। अभ्यर्थियों का यह भी संगीन आरोप है कि सरकार की ओर से उनसे कहा गया कि उन्हें समय आने पर ही नौकरी दी जाएगी और अभ्यर्थी सरकार को नई भर्ती निकालने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं।

मंत्री के कथित बयान से सम्मान को पहुंची ठेस, बढ़ा तनाव

बातचीत के विफल होने के अलावा एक और बड़ी वजह रही जिसने अभ्यर्थियों के आक्रोश को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि चर्चा के दौरान मंत्री की तरफ से सीधे तौर पर उनकी शिक्षक बनने की योग्यता और क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए गए। इस कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया।

हाथों में तिरंगा, मोमबत्ती और जुबां पर राष्ट्रगान

शनिवार को अपने आंदोलन को एक नई धार देते हुए सैकड़ों अभ्यर्थियों ने शाम को एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। हाथों में जलती हुई मोमबत्ती और देश का गौरव तिरंगा थामे इन युवाओं ने बेहद शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। इस मार्च के दौरान अभ्यर्थियों ने देशभक्ति के जज्बे के साथ राष्ट्रीय गान भी गाया। वे सरकार को यह दिखाना चाहते हैं कि वे अनुशासित और शांतिप्रिय तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार के अड़ियल रवैये को देखते हुए अब इन अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल पर बैठने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

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