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नितिन गडकरी को जब मिला था प्रधानमंत्री बनने का ऑफर, लेकिन वफादारी ने रोका

नितिन गडकरी ने बीते शनिवार को नागपुर में एक समोराह के दौरान प्रधानमंत्री पद को लेकर नया ही खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि एक नेता ने उनके सामने यह प्रस्ताव रखा था कि अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनका समर्थन किया जाएगा।

राहुल गोस्वामी

नागपुर : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बीते शनिवार को नागपुर में एक समोराह के दौरान प्रधानमंत्री पद को लेकर नया ही खुलासा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि एक नेता ने उनके सामने यह प्रस्ताव रखा था कि अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनका समर्थन किया जाएगा। हालांकि, गडकरी ने इसके खुलासा बिल्कुल नहीं किया कि प्रस्ताव रखने वाले नेता किस पार्टी से थे।

दरअसल नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बीते शनिवार को यहां एक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में कहा कि, “मैं किसी का बी नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन एक शख्स ने मुझसे कहा कि अगर आप प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, तो हम आपका समर्थन करेंगे। मैंने कहा, आपको मेरा समर्थन क्यों करना चाहिए। मुझे आपका समर्थन क्यों लेना चाहिए। प्रधानमंत्री बनना ही मेरे जीवन का लक्ष्य नहीं है। मैं अपने विश्वास और संगठन के प्रति बहुत वफादार हूं और मैं किसी भी पद के लिए कोई भी समझौता नहीं करने जा रहा, क्योंकि मेरा विश्वास मेरे लिए सबसे अहम है। मुझे लगता है कि यह विश्वास ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।”

लेकिन उन्होंने यह संकेत जरुर दिया कि एक विशेष वरिष्ठ विपक्षी राजनेता ने 2024 के आम चुनावों से पहले उनसे संपर्क किया था। वहीं जब यह माना जाता था कि BJP पूरा बहुमत हासिल नहीं कर सकती है और उसे कुछ विपक्ष के समर्थन की जरूरत हो सकती है।

वहीं अपने भाषण में, गडकरी ने पत्रकारिता और राजनीति दोनों में नैतिकता के महत्व को जोर दिया। गडकरी ने यह निष्कर्ष निकाला कि लोकतंत्र तभी सफल होगा जब सभी चार स्तंभ - न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया - नैतिक मानकों का पालन करें। उनकी टिप्पणी ने एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में ईमानदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया।गडकरी ने समारोह में चार वरिष्ठ पत्रकारों को पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए 2023-24 के अनिलकुमार पुरस्कार से सम्मानित किया। ये पत्रकार हैं विवेक देशपांडे (पूर्व में इंडियन एक्सप्रेस में), रामू भागवत (टाइम्स ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त), श्रीमंत माने (संपादक, लोकमत विदर्भ) और राम भाकरे (लोकसत्ता)।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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