Dr. S.R Ranganathan Birth Anniversary: भारत में बहुत कम लोगों को पता होगा कि हर साल 12 अगस्त को पूरी दुनिया में वर्ल्ड लाइब्रेरी साइंस डे मनाया जाता है और उससे भी कम लोगों ये जानते हैं कि यह दिन जिस व्यक्ति को समर्पित है उनका संबंध भारत है। व्यक्ति जिन्हें लाइब्रेरी साइंस के जनक माना जाता है, जिन्होंने लाइब्रेरी को केवल किताबों की जगह नहीं, बल्कि सीखने का केंद्र बनाने पर जोर दिया। हम बात कर रहें हैं डॉ. एस. आर. रंगनाथन की, जिनके जन्मदिन के मौके पर भारत में नेशनल लाइब्रेरियन डे मनाया जाता है।
डॉ. शियाली रामामृत रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त 1892 को शियाली, मद्रास प्रेसीडेंसी में सामान्य तमिल ब्राह्मण परिवार हुआ था। शुरुआत में उन्होंने गणित के शिक्षक के रूप में काम किया। बाद में वे लाइब्रेरी के क्षेत्र में आए और 1924 में मद्रास यूनिवर्सिटी के पहले लाइब्रेरियन बने। इंग्लैंड की यात्रा के दौरान उन्होंने आधुनिक लाइब्रेरी व्यवस्था को करीब से समझा। इसके बाद उन्होंने लाइब्रेरी को केवल किताबों की जगह नहीं, बल्कि सीखने का केंद्र बनाने पर जोर दिया।
1931 में डॉ. रंगनाथन ने लाइब्रेरी साइंस के पांच महत्वपूर्ण नियम बताए।
पहला: किताबें इस्तेमाल के लिए होती हैं।
दूसरा: हर पाठक की अपनी किताब होती है।
तीसरा: हर किताब का अपना पाठक होता है।
चौथा: पाठक का समय बचाना चाहिए।
पांचवां: लाइब्रेरी एक बढ़ती हुई संस्था है।
ये नियम आज भी लाइब्रेरी सेवाओं को लोगों की जरूरतों के अनुसार बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
डॉ. रंगनाथन ने ज्ञान को व्यवस्थित करने के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया। उन्होंने कोलन क्लासिफिकेशन सिस्टम और क्लासिफाइड कैटलॉग कोड विकसित किए। इन तरीकों से किताबों और जानकारी को व्यवस्थित करना आसान हुआ। उनके वैज्ञानिक और व्यवस्थित विचारों ने लाइब्रेरी साइंस को एक मजबूत आधार दिया। उनके काम का प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की लाइब्रेरी व्यवस्था पर भी पड़ा।
डॉ. रंगनाथन ने अपना जीवन भारत में लाइब्रेरी आंदोलन को मजबूत बनाने में लगा दिया। उन्होंने लाइब्रेरी साइंस की शिक्षा को बढ़ावा दिया और पब्लिक लाइब्रेरी के विकास के लिए काम किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी को बेहतर बनाने में योगदान दिया और इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन से भी जुड़े रहे। उन्होंने डॉक्यूमेंटेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की और रिसर्च व प्रोफेशनल शिक्षा को आगे बढ़ाया।
आज लाइब्रेरी का मतलब केवल किताबों की अलमारियां नहीं है। डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन एक्सेस ने लाइब्रेरी की भूमिका को और बड़ा कर दिया है। अब लाइब्रेरी डिजिटल जानकारी, रिसर्च डेटा, ऑनलाइन संसाधनों और नई तकनीकों तक पहुंच उपलब्ध कराती हैं। रंगनाथन का यह विचार कि लाइब्रेरी एक बढ़ती हुई संस्था है, आज के डिजिटल दौर में पूरी तरह सही दिखाई देता है।
आज लाइब्रेरियन सिर्फ किताबों की देखभाल करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। वे शिक्षकों, रिसर्चर्स और छात्रों की मदद करने वाले विशेषज्ञ हैं। वे सही जानकारी खोजने, डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने और भरोसेमंद स्रोत पहचानने में लोगों की सहायता करते हैं। गलत जानकारी और इंटरनेट पर बढ़ते कंटेंट के दौर में लाइब्रेरियन लोगों को सही, उपयोगी और विश्वसनीय जानकारी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. रंगनाथन के योगदान को देश और विदेश में सम्मान मिला। उन्हें 1957 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनकी सोच ने कई पीढ़ियों के लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स को प्रेरित किया है। उनका मानना था कि लाइब्रेरी समाज की सेवा करने वाली जीवंत संस्था होनी चाहिए। आज भी उनके विचार लाइब्रेरी को अधिक उपयोगी, आधुनिक, लोगों के अनुकूल और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा दिखाते हैं।