Mayawati on Mohan Bhagwat Reservation Remark: उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं और बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने भागवत की टिप्पणी को संकीर्ण और जातिवादी सोच का परिचायक बताते हुए SC और ST वर्ग के मौजूदा आरक्षण में किसी भी तरह के बदलाव के खिलाफ चेतावनी दी है।
मायावती ने रविवार, 9 अगस्त की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर RSS प्रमुख के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। दरअसल, मुंबई में एक युवा कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा था कि जिन लोगों की स्थिति बेहतर हो चुकी है, उन्हें आरक्षण का लाभ छोड़कर इसे जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के राजनीतिकरण से समाज में कड़वाहट पैदा हो रही है।
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज, जिसमें SC, ST और OBC वर्ग शामिल हैं, के लिए आरक्षण सिर्फ आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सम्मान, सामाजिक परिवर्तन और जातिगत भेदभाव से सुरक्षा का संवैधानिक साधन भी है। BSP प्रमुख ने कहा कि SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर जैसी व्यवस्था लागू करना संविधान और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक न्याय के उद्देश्यों के विपरीत होगा।
उन्होंने RSS प्रमुख के उस सुझाव पर भी सवाल उठाया, जिसमें लाभ पाने वाले लोगों से स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ने की बात कही गई थी। मायावती के मुताबिक, आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद कई लोगों को सामाजिक स्तर पर जातिगत भेदभाव और असमानता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
मायावती ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अदालतों में SC-ST आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों पर मजबूती से अपना पक्ष रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों की कमजोर पैरवी के कारण कई बार सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते हैं। BSP प्रमुख ने RSS और उसके प्रमुख मोहन भागवत को आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति से दूर रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान किया जाना चाहिए और आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव या छेड़छाड़ की वकालत से बचना चाहिए।
दरअसल, RSS प्रमुख मोहन भागवत मुंबई में आयोजित एक युवा कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि जिन लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहतर हो चुकी है, उन्हें आरक्षण का लाभ जरूरतमंद लोगों के लिए छोड़ने पर विचार करना चाहिए। भागवत की इसी टिप्पणी पर मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक स्थिति सुधारना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और असमानता को दूर करना भी है।