SIR Controversy: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा बोला है। एसआईआर विवाद के बीच उनके इस्तीफे की मांग की और कहा कि कांग्रेस पार्टी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के मुद्दे और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर गंभीरता से लड़ाई लड़ेगी। पार्टी का रुख बताते हुए खड़गे ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी और सदस्य अपने सुझाव देंगे।
उन्होंने कहा कि कल की बैठक में चर्चा के दौरान समिति के सभी सदस्य अपने सुझाव देंगे। यह मुद्दा पूरे देश, हमारे लोकतंत्र के अस्तित्व और देश के बने रहने से जुड़ा है। इसीलिए हम इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर हैं। हम लड़ेंगे, और देखेंगे। SIR विवाद पर EC की सफाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, खड़गे ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार बीजेपी की विचारधारा को बढ़ावा दे रही है। खड़गे ने कहा, "वे तो ऐसा ही कहेंगे, लेकिन उनके अपने लोगों ने ही उनका पर्दाफाश किया है और उनके अपने लोग ही यह बात बता रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि केरल के एक मुख्य सचिव ने भी कहा है कि CEC ने खुद उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा था। इसका मतलब है कि सबसे ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति बीजेपी की विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है और वह बीजेपी का कार्यकर्ता बन गया है। इसलिए यह साफ है। इसमें कोई शक नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "अगर उनमें जरा भी नैतिक अधिकार बचा है, तो उन्हें उस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। और उसके बाद, इस्तीफा देने के बाद भी, हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।"
इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि CEC "चुनावों में मैच-फिक्सिंग" कर रहे हैं। उन्होंने एक मलयालम समाचार चैनल की रिपोर्ट का हवाला दिया था जिसमें दावा किया गया था कि ज्ञानेश कुमार ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन से 2026 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ने के लिए संपर्क किया था। इस बीच, EC ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र, जिस पर सवाल उठे थे, चुनाव आयोग में डेप्युटेशन पर काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि किसी नीतिगत मामले से।
EC और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच ये बातें सामने आईं। विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR और चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। इन आपत्तियों में फ़ॉर्म 6, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और वोटर लिस्ट के डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।