अमित शाह ने की प्रधानमंत्री की तारीफ। Source. Social Media
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मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है, अमित शाह ने क्यों कही ये बात? कोरोना काल का भी सुनाया बड़ा अनुभव

Amit Shah Speech: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्रालय की जिम्मेदारियों और उससे जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की है।

सिमरन सिंह

Amit Shah Viral Video: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्रालय की जिम्मेदारियों और उससे जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के तौर पर उनके हिस्से में आंदोलनों और आतंकवाद जैसी परिस्थितियों से निपटना लिखा है। अपने संबोधन में अमित शाह ने कोरोना महामारी के शुरुआती दौर को भी याद किया और बताया कि उस समय देश में हालात संभालना सरकार और प्रशासन के लिए कितना मुश्किल था। उनके भाषण का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर अब चर्चा का विषय बन गया है।

मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है

इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह अपने कार्यकाल के दौरान सामने आई अलग-अलग चुनौतियों का जिक्र कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, “मैं एक अनुभव बताना चाहता हूं। केंद्र में मुझे गृह मंत्रालय ही मिला है। तो मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है। आतंकियों से भी निपटना है।” अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और राजनीतिक विरोध देखने को मिल रहा है। वहीं हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ था। ऐसे प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती पैदा करता है।

कोरोना काल को याद कर सुनाया अनुभव

बता दें कि अमित शाह ने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय कर्फ्यू लागू करना भी आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद जैसे बड़े शहर में लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सैकड़ों पुलिस वाहनों पर माइक लगाकर घोषणा करनी पड़ती थी कि अगले दिन सुबह 8 बजे से कर्फ्यू लागू होगा और लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना है। उन्होंने बताया कि जब देश में कोरोना संक्रमण की शुरुआत की जानकारी मिली तो वह और प्रधानमंत्री चिंतित थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था, “फिर मुझे प्रधानमंत्री ने कहा कि चिंता कर के क्या होगा। रास्ते सोचने पड़ेंगे। हम एक बार जनता कर्फ्यू लगाते हैं।”

जनता कर्फ्यू का सुनाया किस्सा

इसके साथ ही अमित शाह ने बताया कि उन्होंने उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आशंका जताई थी कि जनता कर्फ्यू का प्रयोग सफल नहीं होगा क्योंकि इतनी घोषणाओं के बावजूद लोग बाहर निकल सकते हैं। लेकिन 8 बजे घोषणा के बाद अगले दिन सड़कों पर अभूतपूर्व सन्नाटा दखने को मिला। उन्होंने कहा, “लेकिन 8 बजे उन्होंने घोषणा की और दूसरे दिन पूरा रोड सुनसान था। कोई नहीं निकला था सड़क पर। तब उन्होंने पूरे भरोसे से कहा था कि ये लड़ाई हम जीत जाएंगे। फिर जब कोरोना के बाद हमने विश्लेषण किया तो पाया कि सबसे तेज वैक्सीन बनाने वाले 3 देशों में हमारा भारत था। और हमेने दुनिया के 70 देशों में वैक्सीन भेजकर लोगों को बचाया।”

युवाओं को आत्मविश्वास देने पर जोर

अपने संबोधन के अंत में गृह मंत्री ने कहा कि भारत को हीनभावना से बाहर निकलने की जरूरत है। उनके मुताबिक देश के युवाओं को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि भारत बड़े से बड़े संकट का सामना करने में सक्षम है। उनके बयान का संदेश यही रहा कि मुश्किल परिस्थितियों में घबराने के बजाय समाधान तलाशना और आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी है।

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