ISRO EOS-5 Satellite Launch: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) अगले महीने 4 सितंबर की सुबह श्रीहरिकोटा से GSLV F17 रॉकेट के जरिए EOS-5 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है। भारत के लिए EOS-5 सैटेलाइट का लॉन्च कई मायनों में अहम है। ISRO ने इससे पहले भी दो बार इसे लॉन्च करने को कोशिश की थी। लेकिन बदकिस्मती से दोनों बार किसी न किसी वजह से मिशन फेल हो गए थे।
ISRO का यह मिशन अगर सफल रहा तो भारत को करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से अपने भू-भाग और आसपास के समुद्री इलाकों पर लगातार नजर रखने की बड़ी क्षमता मिलेगी। EOS-5 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। आइए आपको बताते हैं कि EOS-5 सैटेलाइट भारत के लिए इतना अहम क्यों है? ISRO के EOS-5 मिशन की सफलता से देश को क्या फायदे होंगे? और EOS-5 सैटेलाइट की क्या खासियत है?
EOS-5 का लॉन्च ऐसे समय हो रहा है जब ISRO का भरोसेमंद PSLV लगातार दो मिशनों में असफल रहा है। मई 2025 में EOS-09 को लेकर जा रहा PSLV-C61 मिशन फेल हुआ था। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को EOS-N1 और दूसरे सैटेलाइट लेकर उड़ने वाला PSLV-C62 भी सफल नहीं हो सका। PSLV के लंबे इतिहास में लगातार दो असफलताएं एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं।
लगातार दो असफलताओं के बाद PSLV को अतिरिक्त जांच और परीक्षणों से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि, EOS-5 मिशन में इस्तेमाल होने वाला GSLV Mk II अलग रॉकेट है। इसमें PSLV जैसी इंजन और प्रोपल्शन प्रणाली का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए PSLV की समस्याओं का सीधा असर GSLV पर पड़ने की आशंका कम है। यही वजह है कि ISRO इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।
EOS-5 का मिशन ISRO के एक पुराने असफल प्रयास से भी जुड़ा है। 12 अगस्त 2021 को GSLV-F10 रॉकेट के जरिए EOS-03 को लॉन्च करने की कोशिश की गई थी। लेकिन रॉकेट के स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी आ गई। क्रायोजेनिक इंजन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाया और सैटेलाइट अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद मिशन असफल घोषित हुआ।
2021 की नाकामी के बाद ISRO ने इसी तरह की क्षमता विकसित करने पर काम जारी रखा। EOS-5 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह बहुत ऊंची कक्षा से भारत पर लगातार नजर रख सके। इसलिए यह मिशन ISRO के लिए सिर्फ एक नया सैटेलाइट लॉन्च करना नहीं है। यह पांच साल पहले अधूरे रह गए प्रयास को सफल बनाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
EOS-5 मिशन GSLV Mk II के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। इस रॉकेट ने हाल ही में NASA और ISRO के संयुक्त NISAR मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया था। NISAR पृथ्वी की निगरानी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मिशन है। उसकी सफलता ने GSLV Mk II की क्षमता पर भरोसा बढ़ाया है। अब EOS-5 मिशन रॉकेट की विश्वसनीयता को और मजबूत करने का मौका देगा।
EOS-5 में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा लगाया गया है। इससे भारत के भू-भाग, सीमावर्ती क्षेत्रों और समुद्री इलाकों की बार-बार तस्वीरें ली जा सकेंगी। सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल मौसम की निगरानी, आपदा प्रबंधन, कृषि योजना और सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जा सकता है। इस तरह यह भारत के लिए अंतरिक्ष से लगातार निगरानी करने वाला एक महत्वपूर्ण सिस्टम बन सकता है।
सैटेलाइट का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी किया जा सकेगा। चक्रवात, बाढ़, बादल फटने और जंगलों में आग जैसी घटनाओं पर लगातार नजर रखी जा सकती है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को प्रभावित इलाकों की जल्दी जानकारी मिलेगी। मौसम वैज्ञानिक भी बदलते हालात पर नजर रख सकेंगे। समय पर जानकारी मिलने से राहत और बचाव की तैयारियां तेजी से करने में मदद मिल सकती है।
EOS-5 भारत के भू-भाग के साथ समुद्री इलाकों की निगरानी में भी मदद कर सकता है। हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग के कारण इससे रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसका मुख्य उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन रहेगा। सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा जमीन, मौसम, समुद्र और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी गतिविधियों को समझने में भी उपयोगी हो सकता है।
सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी का फायदा मौसम विभाग, कृषि विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मिल सकता है। लगातार तस्वीरें मिलने से फसलों और जमीन की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा। वहीं बाढ़, चक्रवात या आग जैसी घटनाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का तेजी से आकलन किया जा सकेगा। इससे सरकारी एजेंसियों को बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया है कि स्पेस एजेंसी लंबे अंतराल के बाद फिर से अपने लॉन्च कार्यक्रमों में तेजी लाने जा रहा है। योजना के मुताबिक EOS-5 को 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन ISRO के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद एजेंसी कई बड़े मिशनों को लगातार आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
ISRO के मुताबिक, एजेंसी की योजना अभी से मार्च 2027 के बीच सात लॉन्च करने की है। इनमें गगनयान कार्यक्रम का G1 मिशन भी शामिल है। यह भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की पहली बिना क्रू वाली उड़ान होगी। इसके अलावा कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े मिशन भी इस अवधि में किए जाने की योजना है। ISRO ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भी बड़ा लक्ष्य तय किया है।