रेयर अर्थ मिनरल्स (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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India Russia Deal: रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई के लिए भारत और रूस की कंपनी रोसनेफ्ट में बड़ी डील

India Russia Deal: चीन की पाबंदियों के बाद भारत ने रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। भारत की इस अहम पहल से देश के इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिफेंस सेक्टर को बड़ा फायदा होगा।

प्रिया सिंह

India Russia Deal News: चीन की ओर से रेयर अर्थ के निर्यात पर प्रतिबंध लगने के बाद भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट से बातचीत शुरू कर दी है। साइबेरिया में मौजूद रेयर अर्थ भंडारों के अध्ययन को लेकर दोनों देशों में चर्चा चल रही है। यह पहल इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने में लाभदायक होगी।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग परमानेंट मैग्नेट बनाने में किया जाता है जो आज के समय में बहुत जरूरी हैं। ये मैग्नेट आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होते हैं। भारत अपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक दूसरे देशों से आयात पर निर्भर रहता है। देश में अभी इन खनिजों की रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग की पर्याप्त क्षमता पूरी तरह से मौजूद नहीं है।

चीन की पाबंदी से बढ़ी चिंता

दुनिया भर में रेयर अर्थ का सबसे बड़ा सप्लायर चीन है जिसके प्रतिबंधों के कारण भारत सहित कई देशों को परेशानी हुई है। सप्लाई चेन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। इसी रणनीति के तहत भारत और रूस के बीच यह समझौता होने जा रहा है जो भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।

रूस के साथ बढ़ रहा सहयोग

शिखर सम्मेलन के दौरान रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों में पूरी सहमति बनी थी। रूस के पास दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ भंडारों में से एक है जो साइबेरिया और मुरमंस्क क्षेत्रों में मौजूद है। रोसनेफ्ट ने पिछले वर्ष साइबेरिया के टॉमटोर क्षेत्र में स्थित एक रेयर अर्थ भंडार का सफलतापूर्वक अधिग्रहण भी किया था।

नई टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर फोकस

रूस की कंपनी गिरेडमेट और भारत की नेक्सॉन जियोकेम के बीच रेयर अर्थ प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के रिसर्च के लिए समझौता हुआ है। इसके अलावा गिरेडमेट और टेक्समिन के बीच नियोडिमियम-आयरन-बोरोन मैग्नेट तकनीक के संयुक्त विकास को लेकर सहयोग शुरू किया गया है। इन नई पहलों से भारत को भविष्य में अपनी रेयर अर्थ सप्लाई चेन मजबूत करने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

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