Randhir Jaiswal Response On PoK Unrest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी अशांति को लेकर भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस्लामाबाद को कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के उन दावों को 'झूठा', 'भ्रामक' और 'मनगढ़ंत' बताया, जिनमें में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए ऐसे निराधार आरोप लगा रहा है। भारत का कहना है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन वहां की जनता के आर्थिक शोषण, प्रशासनिक दमन और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का परिणाम हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह पीओके की स्थिति पर ध्यान दे और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए।
उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान के इन झूठे और मनगढ़ंत आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। ये बयान पाकिस्तान की विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।” प्रवक्ता ने कहा कि पीओके में चल रहा विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों का परिणाम है, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखना और प्रशासनिक दमन शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई, आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति पर रोक, इंटरनेट बंदी और नागरिकों पर बल प्रयोग किया है, जिसके चलते कई लोगों की मौत भी हुई है।
तो वहीं विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करके हुए कहा कि वह इस स्थिति पर ध्यान दे और पाकिस्तान को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए। रणधीर जायसवाल ने पहले भी 9 जून को कहा था कि पाकिस्तान फर्जी खबरों और वीडियो के जरिए अपनी कमियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
ये भी पढ़ें- आवाज उठाने पर गोलियों से भूना जा रहा, Pok में पुलिस की बर्बरता पर भड़का भारत, कहा- कश्मीर भारत का हिस्सा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीओके के रावलाकोट क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। यह तनाव उस समय बढ़ा जब पाकिस्तानी प्रशासन ने संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए नागरिकों पर कथित अत्याचारों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है।