संसद भवन। इमेज-सोशल मीडिया 
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संसद नहीं चलने दूंगा अगर...अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल ने सर्वदलीय बैठक के बाद दिखाए तेवर

Winter Session Parliament: संसद के शीतकालीन सत्र से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने मोर्चा खोला है।

रंजन कुमार

Winter Session Parliament 2025: बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत कई प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया तेजी से चल रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवाद पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने SIR की खिलाफत की है। वैसे, कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है।

इसी बीच समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता तथा राज्यसभा सांसद और अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव ने कहा कि सरकार एसआईआर पर चर्चा करने से नहीं कतरा सकती, क्योंकि यह चुनाव आयोग की ओर से कराया जा रहा है।

सरकार एसआईआर पर चर्चा करने से नहीं कतरा सकती: राम गोपाल

संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले यानी रविवार को सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि अगर, शीतकालीन सत्र के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा नहीं हुई तो वह संसद नहीं चलने देंगे। सरकार एसआईआर पर चर्चा करने से नहीं कतरा सकती है, क्योंकि यह चुनाव आयोग द्वारा किया जा रहा है। बता दें, 1 दिसंबर यानी सोमवार से संसद की शीतकालीन सत्र की शुरुआत होनी है। जो कि 19 दिसंबर तक सत्र चलेगा।

कांग्रेस ने क्या दी प्रतिक्रिया?

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सोमवार से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण, दिल्ली आतंकी हमले समेत देश के लोगों से जुड़े दूसरे जरूरी मुद्दों पर विस्तार में चर्चा होनी चाहिए।

किरेन रिजिजू क्या बोले?

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील की कि वे संसद के आने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान मर्यादा बनाए रखें। संसद की कार्यवाही में रुकावटों से बचें। उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद शांत दिमाग से काम करेंगे, ताकि कार्यवाही आसानी से हो सके।

क्या हैं आसार?

विपक्ष एसआईआर को लेकर सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति बना रहा है। सत्र के दौरान संसद के अंदर से लेकर बाहर तक SIR पर विपक्ष का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। वहीं, सरकार मदनी के जिहाद विवाद पर आक्रामक रुख अपना सकती है। सरकार परमाणु ऊर्जा विधेयक समेत 10 विधेयक पेश कर सकती है।

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