बजट पेश करते हुए प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई) 
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Budget History: सूटकेस से टैबलेट तक, तस्वीरों में देखें भारतीय बजट के बदलने की पूरी कहानी

Union Budget Evolution: सूटकेस से टैबलेट तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। 1860 के पहले बजट से लेकर आज के डिजिटल बही-खाता तक भारतीय बजट के 166 साल पुराने इतिहास की सबसे यादगार झलकियां शानदार हैं।

प्रीति शर्मा
भारत के बजट इतिहास की शुरुआत 7 अप्रैल 1860 को हुई थी। स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने देश का पहला बजट पेश किया था। उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और बजट की परंपरा भी वहीं से आई थी।
साल 1999 तक भारत का बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह ब्रिटिश समय के अनुसार तय था ताकि लंदन के लोग इसे सुन सकें। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदलकर सुबह 11 बजे का समय तय किया।
दशकों तक बजट का मतलब लेदर ब्रीफकेस माना जाता रहा। असल में बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द Bougette से हुई है जिसका अर्थ है चमड़े का थैला। हर वित्त मंत्री अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग रंगों के ब्रीफकेस लेकर संसद पहुंचते थे।
साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने औपनिवेशिक विरासत को छोड़ते हुए लेदर ब्रीफकेस का त्याग कर दिया। उन्होंने लाल कपड़े में लिपटा बही-खाता पेश किया। जिस पर नेशनल एम्बलम बना हुआ था। इसे भारतीय संस्कृति के साथ जोड़कर देखा गया।
साल 2021 में एक और बड़ा बदलाव आया। कोरोना महामारी के बीच देश का पहला पेपरलेस बजट पेश किया गया। वित्त मंत्री ने पारंपरिक दस्तावेजों की जगह मेड इन इंडिया टैबलेट से बजट पढ़ा जो डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम था।
बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी का आयोजन होता है। इसके बाद बजट की छपाई और फाइनल डेटा से जुड़े अधिकारी मंत्रालय के बेसमेंट में तब तक कैद रहते हैं जब तक बजट संसद में पेश न हो जाए। यह परंपरा बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए निभाई जाती है।

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