Finance Ministry Report on Increasing Petrol-Diesel Prices: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के चलते पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट अपने चरम पर है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे भारत के पड़ोसी देशों में तेल कीमतें आसमान छू रही हैं। हालांकि भारत में फिलहाल तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन बहुत जल्द सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। 29 अप्रैल को वित्त मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि सरकार जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने का फैसला कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ देशों ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का बोझ आम जनता पर नहीं डाला था, लेकिन दुर्भाग्यवश इसे टाला नहीं जा सका।
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि पांच राज्यों के दौरान तेल की कीमतों में दी गई रियायत अस्थायी है और सरकार 29 अप्रैल के बाद इनकी कीमतों में बढ़ोतरी करेगी। उन्होंने कहा कि जब तेल सस्ता था, मोदी सरकार ने अपना मुनाफा कमाया। अब जब महंगा है, तो बोझ जनता पर डालेगी।
राहुल गांधी की बात बहुत हद तक सच साबित होती नजर आ रही है। लेकिन सवाल यह है कि सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कितना इजाफा करेगी? भारत इस समय किन-किन देशों से तेल खरीद रहा है और किस कीमत पर खरीद रहा है? आइए, आपको ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब के जरिए बताते हैं कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के लिए आपको अपनी जेब कितनी ढीली करनी पड़ेगी।
29 अप्रैल को वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक इकॉनॉमिक रिपोर्ट में कहा कि भारत इस समय मुख्यतः सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बाकी खाड़ी देशों से अपनी जरूरत का लगभग 80% से 85% तेल आयात करता है। इसके अलावा भारत अमेरिका से छूट मिलने के बाद रूस से भी कच्चा तेल खरीद रहा है। हालांकि, यही छूट अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने को लेकर भी दी है।
इसके बाद भारत ने ईरान से सात साल बाद 40 लाख बैरल कच्चे तेल की डील की, जिसमें से 20 लाख बैरल तेल दो टैंकरों के जरिए गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंचा भी गया है। भारत को कच्चा तेल औसतन 113 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के देश इस समय नुकसान उठा रहे हैं, जबकि कनाडा और जापान जैसे देश इसके लिए पहले से तैयार थे और उन्होंने अपनी जरूरत का लगभग 2 साल का तेल इकट्ठा कर रखा था।
भारत में तेल की कीमतों की बढ़ोतरी को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि मैक्वेरी ग्रुप ने पेट्रोल में 18 रुपये और डीजल में 35 रुपये की बढ़ोतरी की बात कही।
वहीं, स्टैंडर्ड चार्टर्ड का मानना है कि अगर आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो तेल की कीमतों में 8 से 15 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने इसे केवल अफवाह करार दिया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की जरूरत नहीं है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत हर दिन तेल कंपनियां तय करती हैं। इसे डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम कहा जाता है। डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत कंपनियां ह र दिन तेल की कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि, सरकार का अंदरूनी दखल हमेशा से रहा है। भारत में हमेशा से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बड़ा चुनावी मुद्दा रही हैं।
यही कारण है कि सरकार चुनाव से पहले इनमें किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी करने से बचती है। यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ऐसा किया। इससे पहले 2014 से 2019 के चुनाव से पहले कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इसी तरह 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव, 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले तेल की कीमतों में बदलाव नहीं किया गया और वोटिंग के कुछ दिन बाद कीमतों में बढ़ोतरी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन कंपनियों को मार्च में हर दिन करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि सरकारी कंपनियों को कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी पर 6 रुपये प्रति लीटर की हानि हुई। जबकि निजी कंपनियों जैसे 'नायरा एनर्जी' ने मार्च में ही पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये महंगा कर दिया था।
यह भी पढ़ें- एकमुश्त 993 रुपये बढ़ गए सिलेंडर के दाम, 3 महीनों में तीन बार की गई बढ़ोत्तरी, IOCL ने बताया क्यों बढ़ाए रेट
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को संभालने के लिए सरकार आम तौर पर 'काउंटर-सब्सिडी' सिस्टम का उपयोग करती है। इसके अलावा जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो सरकार या तो एक्साइज ड्यूटी कम करती है या कंपनियों को नुकसान उठाने को कहती है। जैसे कि सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल-डीजल पर ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती करने का ऐलान किया था। इसके अलावा भारत फिलहाल अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा रूस से खरीद रहा है, जिससे लागत कम की जा सके।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं है। इसका असर आम जनता की थाली पर भी पड़ेगा। भारत में 70 प्रतिशत माल ढुलाई ट्रकों के जरिए होती है। इसमें सब्जी, फल, अनाज और जरूरी चीजें शामिल हैं, जिनकी कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा टैक्सी, कैब, बस और ऑनलाइन डिलीवरी पर भी असर होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से लोगों का झुकाव इलेक्ट्रिक व्हीकल की ओर बढ़ेगा और इसमें 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि यदि ईरान युद्ध जारी रहा और तेल महंगा हुआ, तो भारत में महंगाई दर 2027 तक 4.7% तक पहुंच सकती है।