चुनाव आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराएगा।
राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां पढ़ने योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने फैसले को देर से उठाया गया कदम बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
KC Venugopal Statement: चुनाव आयोग के मतदाता सूची को पढ़ने योग्य प्रारूप में राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। आयोग ने उन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दिया है, जहां यह प्रक्रिया कराई जानी है।
इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस ने इस फैसले को देर से उठाया गया कदम बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने उनसे इस्तीफे की मांग की और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार की बात कही।
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दिया है। आयोग के फैसले के तहत राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां ऐसे प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिन्हें पढ़ना और कंप्यूटर के जरिए जांचना आसान होगा।
इस कदम को मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों की जांच और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर उन राज्यों में शामिल हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
मतदाता सूची के प्रारूप को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल मतदाता सूची का प्रारूप बदलना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस्तीफा देने और सरकारी गवाह बनने की मांग की। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है। ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं।
के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस वर्ष 2025 से ही मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूचियों की मांग कर रही है। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की बुनियादी जिम्मेदारी है।
उन्होंने आयोग के ताजा फैसले को देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि इससे पहले उठाए गए सवालों और कथित अनियमितताओं का समाधान नहीं हो जाता। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाने की जरूरत है।
वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम' बताया। उनका तर्क है कि राजनीतिक दलों को मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूचियां पहले ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए थीं।
कांग्रेस का कहना है कि पारदर्शिता चुनावी प्रक्रिया की न्यूनतम आवश्यकता है और केवल नए प्रारूप में सूची उपलब्ध कराने से पहले उठाए गए सवाल खत्म नहीं होंगे। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की ओर से कोई अतिरिक्त प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।