रुद्रम II मिसाइल BMD सिस्टम, फोटो- IANS 
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चीन-PAK को झटका! भारत की नई मिसाइल शील्ड ICBM को भी करेगी तबाह, DRDO के इस कदम से दुश्मनों की बढ़ी चिंता

DRDO Successful Tests Rudram II Missile: DRDO ने मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जो ICBM को रोक सकते हैं।

अमन उपाध्याय

DRDO Successful Tests Rudram II Missile And BMD System: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में दुश्मन के विविध और जटिल खतरों के खिलाफ देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने वाली कई महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया है। इन परीक्षणों के साथ ही भारत की सैन्य शक्ति अब पहले से कहीं अधिक घातक और सुरक्षित हो गई है।

दुश्मन की मिसाइलें होंगी नाकाम

10 और 11 जून 2026 को डीआरडीओ ने लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट आयोजित किए, जिसका उद्देश्य लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' क्षमता का प्रदर्शन करना था। इस दौरान मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता का प्रदर्शन पूरी तरह सफल रहा। परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने-अपने निर्धारित लक्ष्यों को हवा में ही सटीकता से नष्ट कर दिया। इन प्रणालियों को विशेष रूप से आधुनिक युग के उभरते मिसाइल खतरों से निपटने के लिए उन्नत स्वदेशी तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है।

दुनिया के 'एलिट क्लब' में भारत की एंट्री

इन सफल परीक्षणों का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि अब भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों की विशेष श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी बीच रास्ते में रोकने और नष्ट करने की क्षमता वाली बीएमडी प्रणाली उपलब्ध है। इसके साथ ही, डीआरडीओ ने 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज' (NASM-MR) का भी पहला सफल फ्लाइट टेस्ट पूरा किया, जो समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में एक गेम-चेंजर साबित होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों की टीम को बधाई देते हुए इसे देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताया है।

आसमान से बरसेगी अचूक आफत

बीएमडी के अलावा, भारतीय वायु सेना (IAF) और डीआरडीओ ने मिलकर हवा से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक 'रुद्रम-II' मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है। एक हवाई प्लेटफॉर्म (लड़ाकू विमान) से दागी गई इस मिसाइल ने अपनी बेजोड़ सटीकता, विश्वसनीयता और उच्च स्तरीय तकनीकी क्षमताओं को साबित कर दिया है। यह मिसाइल दुश्मन के रडार और संचार केंद्रों को नष्ट करने में सक्षम है।

ओडिशा का परीक्षण केंद्र

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में हुए ये परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ के तहत किए गए थे। अत्याधुनिक ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि मिसाइल के सभी प्रमुख उपप्रणालियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 'रुद्रम-II' को हैदराबाद स्थित 'इमारत अनुसंधान केंद्र' (RCI) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।

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