Supreme Court Ban Controversial Book: धर्मेंद्र प्रधान ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का पालन करने की बात कही है जिसमें कोर्ट ने कक्षा 8वी के उस चैप्टर पर बैन लगा दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय शामिल है। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हम न्यायपालिका का अत्यंत सम्मान करते हैं, न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जवाबदेही तय की जाएगी, न्यायिक भ्रष्टाचार पर अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जो हुआ उससे मैं बहुत दुखी हूं, न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमने एनसीईआरटी से पुस्तकों की समीक्षा करवाई।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक 24 फरवरी को मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया था कि क्लास 8 की नई सोशल साइंस बुक में न्यायपालिका को भ्रष्ट दर्शाया गया था, इसके बाद कुछ अधिवक्ताओं ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था और दलील दी थी कि यह पूरी न्यायपालिका के सिस्टम को बदनाम करता है।
उस समय अदालत ने कहा था कि कई न्यायाधीश इस घटनाक्रम से चिंतित हैं और उन्होंने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने टिप्पणी की थी कि वे किसी को भी संस्था की गरिमा को धूमिल करने की अनुमति नहीं देंगे। जिसके बाद एनसीईआरटी ने पुस्तक वापस लेने और अध्याय को संशोधित करने की घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी के बुधवार के पत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्यायपालिका को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश करार दिया, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंस ने कहा कि यह कदम न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास प्रतीत होता है, कोर्ट ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई होगी।
पीठ ने केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभागों के समन्वय से एनसीईआरटी को निर्देश दिया कि पुस्तक की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी सार्वजनिक पहुंच से हटाई जाएं। साथ ही पब्लिकेशन, रीप्रिंट और डिजिटल कॉपी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया है।