Mallikarjun Kharge In CWC Meeting: दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आज मंगलावर, 29 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के कई नेता शामिल हुए।
इस बैठक में सीईसी द्वारा कथित अनियमितताओं के कारण तुरंत हटाने की मौंग और चुनाव आयोग प्रमुख पर प्रेशर बनाने के लिए नैतिक आधार पर पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग की गई ।
सीडब्ल्यूसी बैठक के बारे में जानकारी देते हुए एक्स पोस्ट में खरगे ने लिखा कि फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेवारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है।
हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नीव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को मोदी सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस सोच और भावना के विपरीत है, जिसके तहत यह तय किया गया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो और हर वोट की निष्पक्ष गिनती हो।
बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था- 'Franchise is a most fundamental thing in a democracy' (मताधिकार लोकतंत्र में सबसे बुनियादी चीज है)। कोई भी व्यक्ति, जिसे हमारे संविधान के हिसाब से वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए, उसे किसी लोकल गवर्नमेंट के पूर्वाग्रह या किसी अधिकारी के आदेश पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
बाबा साहेब ने कहा था, किसी अफसर की मर्जी से नाम नहीं कटेगा। आज अफसर भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार के इशारे पर मनमर्जी से वोटर लिस्ट से नाम काट रहे है।
खरगे ने पोस्ट में आगे कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबा साहेब जानते थे कि बिना लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के गरीब और वंचित लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसीलिए उन्होंने भारत के हर नागरिक को वोट का अधिकार देने की जबरदस्त पैरवी की थी।
संविधान सभा में हुई बहस में डा. अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था। लेकिन आज इसका उलटा हो रहा है। रक्षक ही भक्षक बन गया है। संविधान ने जिसे पूरी ताकत दी, जनता के वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उसके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?
उन्होंने आगे कहा कि दिसंबर 1988 में तत्कालनी प्रधानमंत्री स्व० राजीव गांधी ने युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दिया था। और एक प्रधानमंत्री मोदी जी हैं जो GenZ से इतना नाराज हैं कि उन्होंने साजिश के तहत देश के युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना डाली। चुपचाप Form 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया। यह पूरी तरह से गौरकानूनी है।
मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले।
राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा simple format में समय पर उपलब्ध हो।
जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में खुद ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी पक्ष को यह कहने का अवसर न मिले कि जानकारी छिपाई जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है। हम इस मुद्दे को किसी चुनाव को केवल जीतने या हारने की लड़ाई के रूप में नहीं देखते। चुनाव तो आते जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है।
हमें हर नागरिक से कहना है कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम वोटर है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं। चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने खुद CEC की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया। अब पूरे देश को मालूम है कि उनकी लगातार कोशिश सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने की रही है।