Congress Protest Against CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस ने अपना विरोध तेज कर दिया है। कांग्रेस आज देशभर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। लखनऊ, पटना, गुवाहाटी और जम्मू समेत देश कई बड़े शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन को दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया नहीं जाता और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाता, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।
गुवाहाटी में CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता और APCC अध्यक्ष ने कथित वोट चोरी को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि, आज जिस प्रकार से लोगों को पता चला है कि ज्ञानेश कुमार ने अपराध किया है तो आज उनको इस्तीफा देना चाहिए और उन पर कानूनी कार्रवाई होना चाहिए और उनको गिरफ्तार करना चाहिए।
वहीं, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश राम ने पटना में विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि, राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग की पोल खोल रहे थे। आज साबित हो गया कि बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र में वोट चोरी से सरकार बनी है। राहुल गांधी का जवाब अब तक चुनाव आयोग ने नहीं दिया है। हम सड़क पर इसलिए निकले हैं कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा होना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मौजूदा मुद्दों को लेकर राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर लगे सरकारी बोर्ड पर कालिख पोत दी।
पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मीडिया से कहा, अगर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो यह चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे मजबूती से अपना पक्ष रखें। विपक्ष क्या कहता है, इसकी मुझे ज्यादा चिंता नहीं है। राजनीति करना विपक्ष का काम है। अगर वे आरोप नहीं लगाएंगे तो राजनीति कैसे करेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को विपक्ष को खुश करने के लिए नहीं बल्कि जनता के मन में किसी भी तरह का संदेह न रहे, इसलिए अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। चुनाव आयोग को लोगों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर ही आम जनता के मन में शक पैदा हो जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा।