Congress on UPI MDR Charge: कांग्रेस सांसदों ने गुरुवार को 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजेक्शन पर हाल ही में घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रस्ताव पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने चर्चा नहीं की थी। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 0.4 प्रतिशत चार्ज की घोषणा की है।
कांग्रेस के मुताबिक, ज्यादातर व्यापारियों को प्रति ट्रांजेक्शन 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर को यह चार्ज देना होगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रस्तावित UPI चार्ज पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने चर्चा नहीं की थी।
गौरव गोगोई ने दावा किया कि जब वित्त विभाग के प्रतिनिधि समिति के सदस्यों से मिले थे, तो उन्होंने UPI टैक्स से जुड़ा कोई खास प्रस्ताव समिति के सामने नहीं रखा था। गोगोई ने कहा, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने उस UPI टैक्स प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की है जिसकी घोषणा मोदी सरकार ने हाल ही में की है। जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले, तो उनके पास यूपीआई टैक्स पर कोई खास प्रस्ताव नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि समिति के सदस्यों ने MDR की जरूरत पर सवाल उठाए थे, लेकिन चर्चा के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने कोई खास या संतोषजनक जवाब नहीं दिया। गोगोई ने कहा मैं फिर से कहता हूं कि हालिया UPI टैक्स नीतियां छोटे भारतीय व्यापारियों, वेंडर्स और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाएंगी और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाएंगी। वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में पांच कांग्रेस सांसदों में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गौरव गोगोई की बात का समर्थन करते हुए कहा कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही गोपनीय होती है और उनके मुताबिक, इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
तिवारी ने गोगोई के इस दावे का भी समर्थन किया कि समिति के सामने UPI ट्रांजेक्शन पर हालिया MDR से जुड़ा कोई खास प्रस्ताव पेश नहीं किया गया था, जिसमें प्रस्तावित दर और छूट का विवरण शामिल हो। कमेटी के सदस्यों ने एमडीआर को लाने के पीछे के बड़े सिद्धांत और तर्क को लेकर भी चिंताएं जताई थी।
तिवारी ने इस दावे पर भी आपत्ति जताई कि प्रस्तावित उपाय को कमेटी के कुछ सदस्यों का समर्थन मिला था। उन्होंने कहा, यह दावा करना कि किसी खास उपाय को कमेटी के 'कुछ सदस्यों' का समर्थन मिला था, संसदीय कमेटी की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक वर्णन है।