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ममता के आरोपों पर कांग्रेस में दो फाड़, जयराम ने की PM मोदी की निंदा, अधीर ने बंगाल CM को ही बताया झूठा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर से अंदरूनी कलह दिखी है। नीति आयोग की बैठक में ममता के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में अब कांग्रेस नेताओं की राय अलग है।

राहुल गोस्वामी

नई दिल्ली: जहां एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते शनिवार को दावा किया था कि उन्हें नीति आयोग की बैठक में बोलने की अनुमति नहीं देकर अपमानित किया गया। वहीं 'दीदी' को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर से अंदरूनी कलह सामने जाहीर हो गई है। इस मुद्दे पर जहां ममता के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में जहां कांग्रेस नेतृत्व TMC सुप्रीमों के समर्थन में आया तो वहीं दूसरी तरफ उसी दिन पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर झूठ बोलने का संगीन आरोप लगाया है।

इस बाबत दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व ने बीते शनिवार को कहा कि नीति आयोग की बैठक में ममता बनर्जी के साथ जो व्यवहार हुआ है, वह अस्वीकार्य है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया था कि नीति आयोग की बैठकें दिखावा मात्र होती हैं तथा यह संस्था पेशेवर एवं स्वतंत्र नहीं है। कांग्रेस नेता रमेश ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "10 साल पहले स्थापित होने के बाद से, नीति आयोग प्रधानमंत्री का एक "अटैच्ड ऑफिस" रहा है। यह ‘नॉन-बायोलॉजिकल' प्रधानमंत्री के लिए ढोल पीटने वाले तंत्र के रूप में काम करता है।"

उन्होंने यह भी दावा किया कि नीति अयोग ने किसी भी रूप में सहकारी संघवाद को मज़बूत नहीं किया है। इसका काम करने का तरीक़ा स्पष्ट रूप से पक्षपात से भरा रहा है। यह पेशेवर और स्वतंत्र तो बिल्कुल भी नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि, यह अलग तरह के और असहमति से भरे सभी तरह के दृष्टिकोणों को दबा देता है, जो एक खुले लोकतंत्र के मूलतत्व हैं तथा इसकी बैठकें महज़ दिखावा मात्र की होती हैं।

लेकिन दूसरी तरफ अधीर रंजन चौधरी ने इसके उलट बीते शनिवार को कहा कि, नीति आयोग की बैठक को लेकर CM ममता बनर्जी की ओर से किए गए सभी दावे झूठे हैं। चौधरी ने इस बाबत बीते शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर कहा कि पश्चिम बंगाल अराजक स्थिति में है और राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की भी मांग की है।

जानकारी दें कि बीते शनिवार को नीति आयोग की बैठक में बिहार, केरल समेत 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी ने की थी। इस बैठक में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और लेफ्टिनेंट गवर्नर और अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस खास बैठक में गांवों में गरीबी को शून्य स्तर पर लाने यानी इसे पूरी तरह समाप्त करने के विचार पर गहन चर्चा हुई थी।नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं होने वालों में बिहार, केरल के अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और पुडुचेरी राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

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