Tamil Nadu Delimitation Bill: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय आज विधानसभा में परिसीमन को लेकर एक विशेष बिल पेश करने वाले हैं। इसके तहत तमिलनाडु सरकार किसी भी परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करेगी, जिससे संसद में राज्य के सापेक्ष प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। इस बिल के जरिए विजय केंद्र से लोकसभा की सीटों की संख्या 543 बनाए रखने का आग्रह करेंगे।
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में 8 अगस्त को चेन्नई में सांसदों की एक परामर्श बैठक के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के लिए परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई थी। केंद्र सरकार लोकसभा की सीटों को लेकर परिलीमन करवाना चाहती है, ताकि इसके संसद में जनता के प्रतिनिधित्व करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो। केंद्र सरकार इसके तहत लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करना चाहती है।
विधानसभा के एजेंडा के मुकाबिक, मुख्यमंत्री विजय बुधवार सुबह सदन की बैठक में सरकारी प्रस्ताव पेश करेंगे। प्रस्तावित प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच लोकसभा और विधानसभा सीटों का आवंटन कई दशकों से 1971 की जनगणना से जुड़ा हुआ है। इसमें अप्रैल 2026 में संसद में पारित न हो पाने वाले एक संवैधानिक संशोधन विधेयक का जिक्र है, जिसमें परिसीमन पर लंबे समय से चली आ रही रोक को समाप्त करने, 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन करने और लोकसभा की संख्या में पर्याप्त वृद्धि करने का प्रस्ताव था।
इस प्रस्ताव में उन खबरों पर चिंता जाहिर की गई है कि इसी तरह का संवैधानिक संशोधन दोबारा पेश किया जा सकता है। इसमें तर्क दिया गया है कि 1971 के बाद दर्ज की गई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीटों का कोई भी पुनर्वितरण तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर सफलता हासिल की है।
इसमें यह तर्क दिया गया है कि जिन राज्यों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहित जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया है, साथ ही आर्थिक विकास दर्ज किया है और स्वास्थ्य सेवा एवं कल्याण संकेतकों में सुधार किया है, उन्हें परिसीमन के माध्यम से नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की सीटों की संख्या को स्थायी रूप से 543 पर बरकरार रखने और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा आवंटन को फ्रीज करने का आग्रह किया जाएगा, जिससे उनका वर्तमान आनुपातिक प्रतिनिधित्व बना रहे। यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा के मौजूदा प्रतिनिधित्व अनुपात को बनाए रखने का भी प्रयास करेगा और मौजूदा 543 निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग करेगा।