

Ram Nath Kovind Autobiography: दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 12 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' का विमोचन किया। उन्होंने इस कार्यक्रम में रामनाथ कोविंद से जुड़ी 5 अहम घटनाओं का जिक्र किया और युवाओं को उनसे सीख लेने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज हमें रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के लॉन्च का गवाह बनने का मौका मिला है। मैं कोविंद जी को बहुत लंबे समय से जानता हूं और मुझे उन्हें करीब से जानने का अवसर मिला है। राष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनका मार्गदर्शन, और मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह और अपनापन, मेरे लिए सचमुच एक बहुमूल्य धरोहर रहा है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "उनके जीवन के बारे में मेरी समझ और उनकी क्षमताओं के बारे में मेरी जानकारी के आधार पर, मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक अनमोल धरोहर बनेगी। कोविंद जी के जीवन के सफर और समाज व देश में उनके योगदान के बारे में मैं बहुत कुछ विस्तार से कह सकता हूं। लेकिन, किताब लॉन्च का कार्यक्रम तो बस एक 'शुरुआत' की तरह होना चाहिए। सबसे अच्छा यही है कि आप सभी खुद किताब पढ़कर उसका पूरा लाभ उठाएं।"
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं सौभाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां सौ साल से ज्यादा समय तक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं। फिर भी, आज भी मुझे उनकी कमी बहुत गहराई से महसूस होती है।"
उन्होंने बताया, "कोविंद जी ने अभी-अभी एक घटना का जिक्र किया और अपनी किताब में भी लिखा है। जब गर्मियों में उनके घर में आग लग गई थी। उनकी मां ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना घर का सामान बचाने की कोशिश की।
आखिरकार, एक आम परिवार के लिए बच्चों की परवरिश में हर चीज जरूरी होती है। दुख की बात है कि इस कोशिश में वह आग में फंस गईं और उनकी जान चली गई। जरा सोचिए, कम उम्र में ऐसी त्रासदी का सामना करना, इस तरह अपनी मां को खो देना यह कितना दर्दनाक रहा होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र बोले, मुझे याद है कि प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान मैं उनसे राष्ट्रपति भवन में मिलने गया था। प्रोटोकॉल के बावजूद, वह अक्सर आम औपचारिकताओं से हटकर बातचीत करते थे। वह प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे। शुरू में, मैंने उनसे ऐसा न करने का आग्रह किया।
फिर भी, उन्होंने वह विनम्रता कभी नहीं छोड़ी। राष्ट्रपति बनने के बाद, जब वह अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने सम्मानपूर्वक झुककर अपने शिक्षकों के पैर छुए। उन्होंने गांव की मिट्टी को नमन किया और आम ग्रामीणों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। पूरे देश ने वह भावुक दृश्य देखा। उनके व्यवहार ने दुनिया के सामने भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की एक ऐसी छवि पेश की जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है।
युवा पीढ़ी से अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं खास तौर पर युवा पीढ़ी से कहना चाहता हूं कि हम 'रील्स' और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के दौर में जी रहे हैं। शॉर्टकट के इस जमाने में भी, आइए रेलवे स्टेशनों पर लिखी एक बात याद रखें: शॉर्टकट आपकी जिंदगी छोटी कर सकता है।"
पीएम मोदी ने आगे कहा, "मैं युवाओं से अपील करूंगा कि वे उन लोगों की आत्मकथाएं पढ़ें जिन्हें वे पसंद करते हैं। आत्मकथा किसी खास दौर की ऐतिहासिक घटनाओं को एक अनोखे नजरिए से दिखाती है; जीवनी में जिस समय का जिक्र होता है, वह हमें इतिहास के बहुत करीब ले आता है। इसीलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि कोविंद जी की मेहनत आने वाली पीढ़ियों और खासकर युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होगी।"
मोरारजी देसाई के साथ बिताए अनुभव पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कोविंद जी ने मोरारजी भाई देसाई के साथ अपने अनुभवों के बारे में भी विस्तार से बताया है। राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से हटने के बाद भी, वे रुके नहीं हैं; वे 'एक देश, एक चुनाव' जैसे अहम मुद्दों पर काम कर रहे हैं और देश को इनके महत्व के बारे में जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे का समाधान देश के लोकतंत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।"
बता दें कि रामनाथ कोविंद 2017 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति रहे हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने 2015 से 2017 तक बिहार के राज्यपाल और उत्तर प्रदेश से लगातार दो कार्यकाल के लिए राज्यसभा सदस्य के तौर पर काम किया।
वे उत्तर प्रदेश और भाजपा से आने वाले ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभाला। रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में एक कोली परिवार में हुआ था। वे 1991 में भाजपा में शामिल हुए और बाद में 1998 से 2002 के बीच पार्टी के दलित मोर्चा के प्रमुख और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे थे।