Arunachal Pradesh India China Border Issue: भारत ने अरुणाचल प्रदेश में सत्ताईस जगहों के नाम बदले हैं और इन्हें अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया है। इस कदम से चीन पूरी तरह बौखला गया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
चीन ने भारत के इस फैसले की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार और गैर-कानूनी बताया है। चीन का दावा है कि ये इलाके उसके जांगनान क्षेत्र यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा हैं। लेकिन भारत ने चीन के इन दावों को हमेशा की तरह खारिज करते हुए आधारहीन बताया है।
भारत सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के मैप में बस्तियां, झील और स्मारकों समेत सत्ताईस सटीक नाम शामिल किए हैं। जबकि चीन खुद साल 2017 से भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने के ऐसे अवैध हथकंडे अपनाता रहा है। भारत ने चीन को उसकी भाषा में करारा जवाब दिया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1914 में शिमला समझौते के दौरान ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच मैकमोहन लाइन निर्धारित की गई थी। लेकिन चीन इस सीमा रेखा को मानने से इनकार करता आ रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच सीमा पर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
इस कदम के बाद चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीनी मीडिया का कहना है कि जब संबंध सुधर रहे थे, तब भारत ने यह एकतरफा कदम उठाया। उनका दावा है कि इससे सीमा पर शांति खराब होगी और भारत को कोई लाभ नहीं होगा।
इससे पहले अप्रैल में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने स्पष्ट संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों का नाम बदलने का कोई भी प्रयास पूरी तरह गैर-कानूनी है।
गलवान घाटी की हिंसक झड़पों के बाद से ही दोनों देश बातचीत के जरिए रिश्ते सुधारने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन भारत के इस साहसिक फैसले ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
भारत का यह कड़ा फैसला यह दर्शाता है कि वह चीन की आक्रामक और विस्तारवादी नीति के आगे झुकने वाला नहीं है। अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाया गया यह कदम देश की कूटनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। अब देखना होगा कि चीन आगे क्या कदम उठाता है।