लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, फोटो- सोशल मीडिया 
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BJP अध्यक्ष चुनाव में पहली बार वोट नहीं दे पाएंगे आडवाणी और जोशी, जानें नितिन नबीन के चयन का पूरा गणित

BJP President Election: भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना तय है। हालांकि, कुछ कारणों से संस्थापक सदस्य लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी मतदान नहीं कर सकेंगे

प्रतीक पाण्डेय

BJP National President Election 2026: भारतीय जनता पार्टी के 45 साल के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनेगा। जहाँ 45 वर्षीय नितिन नबीन पार्टी की कमान संभालने के लिए तैयार हैं, वहीं पहली बार पार्टी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी मतदाता सूची से बाहर हैं।

दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नबीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री रहे नबीन, दिग्गज नेता दिवंगत नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले नबीन की संगठन में गहरी पैठ मानी जाती है और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पार्टी की चुनावी जीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक की भूमिका निभाएंगे, जो उनके नेतृत्व पर शीर्ष नेतृत्व की मुहर को दर्शाता है।

आडवाणी और जोशी का नाम मतदाता सूची से बाहर क्यों?

1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची का हिस्सा नहीं हैं। इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से तकनीकी आधार है। भाजपा संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी वर्तमान में दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव अभी लंबित हैं। इस कारण दिल्ली से परिषद सदस्यों का आधिकारिक निर्वाचन नहीं हो सका है और वे मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए। इससे पहले लालकृष्ण आडवाणी लंबे समय तक गांधीनगर (गुजरात) और मुरली मनोहर जोशी कानपुर (उत्तर प्रदेश) से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। वर्तमान में ये दोनों नेता पार्टी के मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा हैं, लेकिन दिल्ली में संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इस बार वे औपचारिक रूप से मतदान प्रक्रिया में भागीदारी नहीं कर पाएंगे।

19 जनवरी 2026 को नामांकन

भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 19 जनवरी 2026 को नामांकन की प्रक्रिया होगी। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा नितिन नबीन की निर्विरोध जीत की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। इस बार निर्वाचन मंडल में कुल 5708 निर्वाचक शामिल हैं। पार्टी के नियमों के अनुसार, कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में संगठन चुनाव पूरे होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है, और यह शर्त अब पूरी हो चुकी है।

नितिन नबीन के सामने भविष्य की बड़ी चुनौतियां

जे.पी. नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नबीन के कंधों पर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों, विशेषकर पश्चिम बंगाल, असम और केरल में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना उनके लिए प्रमुख चुनौती रहेगी। भाजपा अब युवा नेतृत्व के माध्यम से अपनी 'अगली पीढ़ी' की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें नबीन का चयन एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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