नीति निर्माता के साथ कांग्रेस रणनीतिकार जयराम रमेश, फोटो - एक्स  
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जन्मदिन विशेष: वो नेता जिसने हिंद-बुद्ध विचारधारा से लेकर ग्लोबल नीति का सफर किया तय, अब कहे जाते हैं राजनीति के 'थिंक टैंक'

राजनीतिक जीवन बेहद समर्पण और रणनीतिक कौशल से भरा रहा है। 1991 और 1997 के आर्थिक सुधारों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं।

विकास कुमार उपाध्याय

नवभारत डिजिटल डेस्क : भारतीय राजनीति के प्रखर विचारक, अर्थशास्त्री और इतिहासकार जयराम रमेश आज 71 वर्ष के हो गए हैं। 9 अप्रैल 1954 को जन्मे जयराम रमेश आज भारतीय राजनीति, अर्थशास्त्र और इतिहास के ऐसे नाम हैं, जो अपने विचारों और काम से देश-विदेश में एक अलग पहचान बना चुके हैं।

इंडियन नेशनल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश वर्तमान में कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं। लेकिन उनका सफर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वे एक प्रखर बुद्धिजीवी, गहन चिंतक और आधुनिक भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार रहे हैं।

रांची में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने दुनिया को समझने की चाह विकसित कर ली थी। उन्होंने खुद को हिंदू-बौद्ध परंपरा का अनुयायी बताया है और खुद को 'हिंद-बुद्ध' कहकर परिभाषित किया है। पंडित नेहरू के विचारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, खासकर उनका आधुनिकता, उदारवाद और वैज्ञानिक सोच को लेकर दृष्टिकोण। महात्मा गांधी को शुरू में उन्होंने एंटी-मॉडर्न समझा, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने गांधी को पढ़ा, वे गांधीजी के विचारों के गहरे प्रशंसक बन गए। टैगोर के साहित्य और दर्शन ने भी उनके सोच को और विस्तृत किया।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

जयराम रमेश ने 1975 में IIT बॉम्बे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद अमेरिका के कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स किया। MIT में उन्होंने टेक्नोलॉजी पॉलिसी में पीएचडी शुरू की लेकिन पारिवारिक कारणों से उसे अधूरा छोड़ भारत लौटना पड़ा।

विश्व स्तर पर योगदान

जयराम रमेश विश्व बैंक में काम कर चुके हैं। वे Indian School of Business यानी ISB हैदराबाद के संस्थापक सदस्य भी हैं। वे एशिया सोसाइटी, न्यूयॉर्क की अंतरराष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं और इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज, नई दिल्ली में विजिटिंग फेलो भी हैं।

राजनीतिक सफर की झलक

उनका राजनीतिक जीवन बेहद समर्पण और रणनीतिक कौशल से भरा रहा है। 1991 और 1997 के आर्थिक सुधारों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं। 2004 में यूपीए सरकार के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार करने वाले मुख्य चेहरों में वे शामिल रहे। जयराम रमेश सोनिया गांधी के कई अंग्रेजी भाषणों के लेखक भी रहे हैं।

2009 में वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अहम निर्णय लिए। वर्तमान में वे एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की पर्यावरणीय नीति सलाहकार समिति में सदस्य हैं, जो विकासशील देशों को पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों पर परामर्श देती है।

निजी जीवन

26 जनवरी 1981 को उनका विवाह के. आर. जयश्री से हुआ था, लेकिन दुर्भाग्य से उनका निधन 2019 में हो गया। वे अब दिल्ली के लोधी गार्डन क्षेत्र में रहते हैं। अपने 71वें जन्मदिन पर जयराम रमेश न केवल भारतीय राजनीति में बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय और नीति-निर्माण जगत में भी प्रेरणा के प्रतीक हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि किस तरह ज्ञान, विचार और सेवा के साथ राजनीति को एक ऊंचे मंच पर पहुंचाया जा सकता है।

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